हम वो शिकंजा हैं जो कोई कस नहीं सकता ...
हमारे देश की सरहदों को कोई डस नहीं सकता ,
अगर है हिम्मत किसी में तो आ जाए ...
कसम हिन्दुस्तान की वो जिंदा बच नहीं सकता !
लेखक :- मनीष अहिराना (भोजपुरी गीतकार)
Writer’s notebook
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सुधर जा ऐ पाकिस्तानी...
वर्ना नक्शे से मिट जाएगा ,
हिन्दुस्तान जिंदाबाद ...
तेरा रोम रोम चिल्लाएगा ,
तेरी आने वाली पीढ़ी मेरे मुल्क की तलवे चाटेगी ...
मत उलझना हिन्दुस्तानी से तेरी मरी मां भी डाटेगी !
सुधर जा ऐ पाकिस्तानी
वर्ना नक्शे से मिट जाएगा ....
हिन्दुस्तान जिंदाबाद
तेरा रोम रोम चिल्लाएगा ....
अर्खुब भरे दर्द ज़मानें रह गए...
हम ईंशानीयत का फर्ज निभाने में रह गए ,
तुम सब चुपके से आकर हमारे घर में आग लगाते रहे ...
और हम तुम्हारे ही घर कि आग बुझाने में रह गए !
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