ab aap ḳhud hī batā.eñ ye zindagī kyā hai karam bhī us ne kiye haiñ magar sitam jaise
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़ पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
नक्कलीले कर्के नजर हानेर पो मार्यो । हजारमा आज मलाई छानेर पो मार्यो ।। स्वास फेर्न लौन हम्मे हम्मे भयो गाठे । जबर्जस्ती अंगालोमा बाधेर पो मार्यो ।। तातो तातो श्वास मलाई हप हपी भयो । लाजै मर्ने काम उस्ले गरेर पो पार्यो ।।
विश्वाश गर्नै गाह्रो हुने बनावटी कहानीको पर्खाईमै बस्नु पर्ने रात कुर्दै बिहानीको अतीत यो बल्झी दिन्छ नचाहेरै घरीघरी भँवराझैं रस चुस्दै छाड्दै हिड्ने बेइमानीको
#छोडेर मलाई नजाउ सानु एक्लै कसरी बाच्छु होला तिमी बिना उजाड संसार भन त कसरी हस्छु होला #टुक्राई मुटु तिमीले गए भन त कसरी गास्छु होला आसु तिमीलाई दिएर सानु म चाही कसरी हस्छु होला
हिन्दै ग्रर्दा आखा कतई अलमली ने होकी। आसा बोकी आछु बिदेश मरी ने पो होकी। घर मा साना साना बाबु रुदै बस्ने होलान। आउछ मेरो बा बा भनी बाटो हेरने होलान।
तिम्रोलागी धडकिने,धडकन उस्तै छ सानु! जीन्दगीमा बाधा, र अडचन उस्तै छ सानु! छाडी जादा तिमीले हरपल रुदै बाचेकोछु मेरो दुखी सँसार अनी,गगन उस्तै छ सानु! बिर्सन्छु भन्छु याद झनै बल्झिएर आउछ जमाना बदलियो हेर, मेरो मन उस्तै सानु! अझैपनी छटपटीमा कोल्टेफेर्दै रातबित्छन तिमी बिनाको, मनको जलन उस्तै छ सानु! एक्लैएक्लै जीन्दगीको गोरेटोमा भौतारिन्छु अर्थहिन मेरो जीबन,र मरन उस्तै छ सानु
timi ma dekhi tada janchhu kasari timi malai bhulna sakchhau kasari ma ta tyo khusboo hun jo timro sans ma baseko chha, aafno sans lai timi rokna sakchhau kasari
Donna is offline
KRB is offline
Himanshu is offline
Abhay is offline
anonymous is offline
abhay is offline
Jack is offline
Jhunnu is offline
kamal is offline
geeta is offline
Jamesmut is offline
Munna is offline
Dileep is offline
bharat is offline
Laden is offline
Please Login or Sign Up to write your book.