तुझ पर ऐतबार करना है,
दिल जान से प्यार करना है,
मेरी खवाइश ज़यादा नहीं बस इतनी है,
तुझे हर लम्हे में अपना बना कर रखना है.
Writer’s notebook
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हर बार दिल से ये पैगाम आए
ज़ुबाँ खोलूं तो तेरा ही नाम आए
तुम ही क्यूँ भाए दिल को क्या मालूम,
जब नजरों के सामने हसीन तमाम आए !
पाकर पनाह तेरे दिल में महबूब,
हम मुक्कमल दीवाने हो जाएंगे,
बस दे दे तू पता अपने दिल का,
हम भी वहां अपना आशियाना बनायेंगे।
तुम्हारे नाम को होठों पर सजाया है मैंने,
तुम्हारी रूह को अपने दिल में बसाया है मैंने,
दुनिया आपको ढूंढ़ती ढूंढ़ती हो जाएगी पागल,
दिल के ऐसे कोने में छुपाया है मैंने।
पहले वह मेरी दोस्त थी अब जाके
मोहब्बत बन चुकी हैं,
पहले सिर्फ उसे याद करते थे,
अब तो आदत बन चुकी हैं।
धारा तीन सौ सात लगनी
चाहिये तेरी निगाहों पर,
यूँ देखना भी कत्ल की कोशिशों
में शुमार होता है !!
मोहब्बत एक खुशबू है हमेशा साथ रहती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी कभी तन्हा नहीं रहता।
मांगी थी दुआ हमने रब से,
मुझे दोस्त दो जो अलग हो सबसे,
उसने मिला दिया हमें आपसे,
और कहा संभालो इसे ये अनमोल
है सबसे।
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो
सांसों में मेरी खुशबु बनके बिखर जाते हो,
कुछ यूँ चला है तेरे इश्क का जादू…
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।
करीब रहूं या दूर जाऊँ मैं,
बस मेरा तो यही आलम है,
तुझे हर वक्त चाहूं मैं !
तुम्हारा आगोश देता है सुकून-ए-इश्क़ मुझको;
ज़िन्दगी भर अपनी बाहों में यूँ ही क़ैद रखना मुझे!
मै तेरे शहर से यार गुजर जाऊंगा ,
उसके बाद फिर कभी भी नजर नहीं आऊंगा ,
हां ये सच है कि तेरा गम सताएगा कादिर ,
लेकिन ये न सोच लेना ये मेरे यार कि मै मर जाऊंगा |||||||
इंतज़ार वही करवाती है ,
जिससे सच्ची मोहब्बत होती है |||||
एक यार मिला था सादा सा बिछड़ेंगे नहीं ये वादा था ,
जिसे कहने लगे थे जान वो अनजान हो गए ,
उस शक्श को हमने इतना चाहा की वो परेशान हो गए ||||||
तुमने देखा ही कहा रुतबा हमारा ,
एक दौर में चलता था सिक्का हमारा ,
उलटी चाले चली जाती है मोहब्बत के खेल में,
एक बेगम से काटा गया था इक्का हमारा ||||||
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