पल पल को बदलता है रंग
गिरगिट की तरह वक़्त
ये जिसके हाथों से निकल जाए
फ़िर उसका ना ताज रहे ना तख्त
ओ वक़्त हाय वक़्त तू कहां कहां
पहोंच गया बे वक़्त
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
Writer’s notebook
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जिन कविता गीत ग़ज़ल शेर
नज़्म दोहे वगैरा वगैरा का मतलब
आम आदमी को समझाना पड़ जाए
अय सी किताबों को फ़ाड़ कर कचरे
के डिब्बों में फेक देना चाहिए
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
कबीरा गरीबन तक नहीं पहुंच पाए
आप के विचार आप के दोहे
बस अमीरन ही गाये अमीरन ही सुने
अमीरन ही समझे आप के दोहे
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
कौन अच्छा है
कौन बुरा है
ये तो ख़ुदा जाने
मेरा दिल तो
सब को ही भला मैने
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
हम खुद के नहीं हो सके
और ज़िद
दुनियां को
अपना बनाने की थी
समाज में दहशत फ़ैली हैं
और फ़ैला हुआ है डर
अब सब को लौट कर आना होगा
अपने अपने घर
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
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