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Priyanka Yadav

New Delhi

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Writer’s notebook

The writing of Priyanka Yadav

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134 piecesLatest published writing · Page 6
Dosti Shayari
9.गम में हंसने वालो को रुलाया नहीं जाता लहरो को पानी से मिलाया नहीं जाता होने वाले खुद ही अपने हो जाते है किसी को कहकर अपना बनाया नहीं जाता
Dosti Shayari
8.खुश नसीब होते है बादल जो दूर रहकर भी ज़मीन पर बरसते है और एक बदनसीब हम है जो एक ही दुनिया में रहकर भी मिलने को तरसते है
Dosti Shayari
7.प्यार क्या होता है हम नहीं जानते ज़िंदगी को हम अपना नहीं मानते गम इतने मिले की एहसास नहीं होता कोई हमें प्यार करे अब विश्वास नहीं होता
Dosti Shayari
6.ना दिल में बसाकर भुलाया करते है ना हँसाकर रुलाया करते है कभी महसूस करके देख लेना हम जैसे तो दिल से रिश्ता निभाया करते है
Dosti Shayari
5.हमसे पूछो क्या होता है पल पल बिताना बहुत मुश्किल होता है दिल को समझाना यार जिंदगी तो बीत जाएगी बस मुश्किल होता है कुछ लोगो को भूल पाना
Dosti Shayari
4.तमन्ना करते हो जिन खुशियों की दुआ है वो खुशियां आपके कदमो में हो खुदा आपको वो सब हक़ीक़त में दे जो कुछ आपके सपने में हो
Dosti Shayari
3.ज़िंदगी लहर थी आप साहिल हुए ना जाने कैसे हम आपकी दोस्ती के काबिल हुए ना भूलेंगे हम उस हसीन पल को जो आप हमारी छोटी सी जिंदगी में शामिल हुए
Dosti Shayari
2.नाराज होना आपसे गलती कहलाएगी आप हुए नाराज तो ये साँसे थम जाएगी आप हँसते रहे युही जिंदगी भर आपकी हंसी से हमारी जिंदगी संवर जाएगी
Dosti Shayari
1.सुकून अपने दिल का मैंने खो दिया खुद को तन्हाई के समुन्दर में डूबो दिया जो थी मेरे कभी मुस्कुराने की वजह आज उसकी कमी ने मेरी पलकों को भीगो दिया
Desh Bhakti Shayari
ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई , मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता , नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई , मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता
Desh Bhakti Shayari
खूब बहती है, अमन की गंगा बहने दो… मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो… लाल हरे रंग में ना बाटो हमको… मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो
Desh Bhakti Shayari
खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं, मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं, करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों, तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है
Desh Bhakti Shayari
कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की मान का है, हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है
Desh Bhakti Shayari
कर जस्बे को बुलंद जवान तेरे पीछे खड़ी आवाम हर पत्ते को मार गिरायेंगे जो हमसे देश बटवायेंगे
Desh Bhakti Shayari
तैरना है तो समंदर में तैरो नालों में क्या रखा हैं, प्यार करना है तो देश से करो औरों में क्या रखा हैं

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