ना मरो सनम बेवफा के लिए,
दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए!
मरना हैं तो मरो वतन के लिए,
हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए!!
Writer’s notebook
Share your writing ↗The writing of Sunil Kumar
Thoughts, feelings and moments shared with the community.
ये बात हवाओ को बताये रखना
रोशनी होगी चिरागों को जलाये रखना
लहू देकर जिसकी हिफाजत हमने की
ऐसे तिरंगे को सदा दिल में बसाये रखना
क्यों मरते हो यारो सनम के लिए,
ना देगी दुपट्टा कफ़न के लिए....
मरना है तो मरो "वतन" के लिए,
तिरंगा तो मिले "कफन" के लिए....
मैं इसका हनुमान हूँ
ये देश मेरा राम है
छाती चीर के देख लो
अन्दर बैठा हिन्दुस्तान है
जय हिंदी जय भारत
Your voice belongs here.
Share a thought, a poem or a story with the community.
Start writing ↗