बाग में उदास क्यों बैठी हो,
गम ना कर फूलों के मुरझाने का..
बाहर आएगा कभी न कभी,
वक्त आएगा मुस्कुराने का...
Writer’s notebook
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प्यार की बात भले ही करता हो जमाना...
मगर प्यार आज भी "माँ" से शुरू होती है...
काश के बरस जाये यहाँ भी कुछ नूर की बारिशें
के ईमान के शीशों पे बड़ी गर्द जमी है
उस तस्वीर को भी कर दे ताज़ा
जिनकी याद हमारे दिल में धुंधली हुई है
कहीं फिसल न जाओ जरा संभल के चलना
मौसम बारिस का भी है और मोहब्बत का भी
ऐ बारिश जरा थम के बरस
जब वो आ जाये तो जम के बरस
पहले न बरस के वो आ न सके
फिर इतना बरस के वो जा न सके....
आज मौसम कितना खुश गवार हो गया
खत्म सभी का इंतज़ार हो गया
बारिश की बूंदे गिरी कुछ इस तरह से
लगा जैसे आसमान को ज़मीन से प्यार हो गया
माली चाहे कितना भी चौकन्ना हो,
फूल और तितली में रिश्ता हो ही जाता हैं!!
जो लम्हा साथ है.. उसे जी भर के जी लेना. "कमबख्त" ये "जिंदगी".. "भरोसे" के काबिल नहीं है!!
खुशी से अपना दिल आबाद करना,
हर ग़म को अपने दिल से आजाद करना,
बस आपसे एक ही गुजारिश है हमारी,
यूं ही उम्र भर हमसे हमेशा प्यार करना
बेगुनाह कोई नहीं
सबके राज होते हैं..
किसी के छुप जाते हैं
किसी के छप जाते हैं..
प्यार में प्यार को आज़माया नहीं जाता
आज़मा कर प्यार कभी पाया नहीं जाता
प्यार पाने के लिए विश्वास की जरुरत है
बिना विश्वास प्यार कभी निभाया नहीं जाता ||
माँ पहले आँसू आते थे तो तुम याद आती थी,
आज तुम याद आती हो और आँसू निकल आते है।
प्यार एक ऐसा समंदर है जिस में फस कर कोई भी व्यक्ति निकल नहीं सकता।
निगाहें नाज करती है
फ़लक के आशियाने से ,
खुदा भी रूठ जाता है
किसी का दिल दुखाने से!!
दिल काँच का होता है लिखना क्या है,
टूट गया फेंक दो रखना क्या है?
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