दोस्तों की महफिल में बैठे हम सारे गम भुला गए
गिरते थे जो हम हाथ पकड़ संभलना सिखा गए
वह दोस्त ही तो थे जो हमें वह जीना सिखा गए
पीते थे खुद ओ बियर हमको सोडा पिला गए
पार्टी तो देते थे अपने नाम के पर बिल हमारे नाम पड़ गए
लगा जो चोट मुझे कभी दर्द उनको होता था
रोता हूं जो मैं कभी उनकी आंखों से आंसू बहता था
ए दोस्त तो ही है जो हमको गमों में हंसना सिखा गए
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