मोहब्बत और नौकरी में एक ही समानता है !!
इंसान करता रहेगा, रोता भी रहेगा पर छोड़ेगा नहीं ।।
Writer’s notebook
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तुम्हीं पे मरता है ये दिल, अदावत क्यों नहीं करता
कई जन्मों से बंदी है, बग़ावत क्यों नहीं करता
कभी तुम से थी जो वो ही शिक़ायत है जमाने से
मेरी तारीफ़ करता है मुहब्बत क्यों नहीं करता...
चमक रहा हूँ जो सूरज की तरह तो सब हैरान हैं क्यों?
मेरी सफलता से सब इतना परेशान हैं क्यों?
हर रात टकराया हूँ मैं इक नई मुसीबत से नई सुबह के लिए
सबको दिखा हुनर मेरा लेकिन
किसी ने न पूछा की ये जख्मों के निशान हैं क्यों?
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