दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बैठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे !
वो हमे एक लम्हा न दे पाए प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बैठे !!
Writer’s notebook
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आरजू होनी चाहिए किसी को याद करने की !
लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं !!
कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को !
याद वही आते हैं, जो उड़ जाते हैं !!!
हम उनसे आंखे चार कर न पाए, हमारी चाहत में ओ अपनी हालें बयां कर ना पाएं !
हमें उनसे मोहब्बत थी ये ओ भी जानते थे, पर ना कभी हम बयां कर पाएं ना कभी ओ बयां कर पाएं !!
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