खामोशियाँ.... बहुत कुछ कहती हैं,
कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो।
Writer’s notebook
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दिल मेरा भी कम खूबसूरत तो न था,
मगर मरने वाले हर बार सूरत पे ही मरे..SK..
ना खौफ ना खबर
अरे कहां हो ओ
बेखबर...SK...
कुछ तुम भूली कुछ मैं भूला मंज़िल फिर से आसान हुई
हम मिले अचानक जैसे फिर पहली पहली पहचान हुई
मेरे शब्दो को इतनी शिद्दत से ना पढा करो,
कुछ याद रह गया तो हमे भूल नही पाओगे !!!
तुम्हारी नफरत पर भी लुटा दी ज़िन्दगी हमने;
सोचो अगर तुम मोहब्बत करते तो हम क्या करते।
सारी उम्र में एक पल भी आराम का न था,
वो जो दिल मिला किसी काम का न था,
कलियाँ खिल रही थी हर गुल था ताज़ा,
मगर कोई भी फूल मेरे नाम का न था।
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