जिंदगी जैसे जलानी थी वैसे जला दी हमने,
अब धुएं पर बहस कैसी और राख पर ऎतराज कैसा ।
Writer’s notebook
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जख्म कहां कहां से मिले छोड़ इन बातों को ,
जिंदगी तू ये तो बता सफर कितना बाकी है।।
आज मेरी "रूह" ने मुझें बड़ा अज़ीब-सा-ताना दिया...
कहा कि yash लिखते तो बहोत ख़ूब हो कभी "अमल भी किया करो..!?
की सुना है दुश्मन के घर में yash सभी के चेहरे उतर गए हैं ,वह अपनी शोहरत से खुश नहीं हैं ,वह मेरी इज्जत से डर गए हैं!
#गुनहगारों की आँखों में #झूठे ग़ुरूर होते हैं.
यहाँ #शर्मिन्दा तो सिर्फ़ #बेक़सूर होते हैं...
Yashraj
माना की अभी कोयला हूं,
जो धीरे - धीरे जल रहा हूं,
इतना भी जल्दी क्या है....
अभी तो परत - परत निकल रहा हूं।।।
Yashraj
सितमगर वक्त के तेवर बदल जाए तो क्या होगा। मेरा सर और तेरा पत्थर बदल जाए तो क्या होगा। अमीरों कुछ ना दो ताने तो ना दो इन फकीरों को जरा सोचो अगर मंजर बदल जाए तो क्या होगा।।
Yashraj
अकेले हैं तो क्या हुआ दोस्तो ,कभी किसी को धोखा तो नहीं दिया ।और ऐसा नहीं है कि हमने कभी किसी से प्यार नहीं किया या कभी किसी को दिल नहीं दिया। बस हमारा तो प्यार एक तरफा था इसलिए आज भी उसे खामोशी से निभाते हैं ।और जो नहीं समझ सके मेरी मोहब्बत को वह मुझे singal boy के नाम से बुलाते हैं।।
By Yashraj
अकेले हैं तो क्या हुआ दोस्तो ,कभी किसी को धोखा तो नहीं दिया ।और ऐसा नहीं है कि हमने कभी किसी से प्यार नहीं किया या कभी किसी को दिल नहीं दिया। बस हमारा तो प्यार एक तरफा था इसलिए आज भी उसे खामोशी से निभाते हैं ।और जो नहीं समझ सके मेरी मोहब्बत को वह मुझे singal boy के नाम से बुलाते हैं।।
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