फिर किसी मोड़ पर मिल जाऊं तो मुंह फेर लेना तुम ,
पुराना इश्क़ हूं फिर उभरा तो कयामत होगी ।
Writer’s notebook
Share your writing ↗The writing of Yash Raj
Thoughts, feelings and moments shared with the community.
सिलसिला यूं ही चलने देंगे शायरी का,
हम भी तो देखें.......
कब तक मेरे अल्फाज तेरे दिल तक नहीं पहुंचते।।
मैं रोज़ लहू के दीप जलाऊंगा ..ऐ इश्क ,,,,
तू एक बार अपनी मज़ार तो बता दे .. ??
मेरी हर शायरी कितनी भी उम्दा हो ,,,
मगर अधूरी है तेरी तारीफ के बिना,,,
दिसंबर बीत जाने से फ़र्क पड़ता नहीं मुझको!
तेरा मेरा रिश्ता दिल का रिश्ता है उसे पुरानी साल नये साल से क्या लेना!
Yashraj
दिल चाहता है आज लिखूँ,, कुछ इस क़दर गहरा.........
कि पढ़ तो पायें सभी मग़र,, समझो सिर्फ़ तुम....
Yashraj
झुका ली उन्होंने नज़रे जब मेरा नाम आया ,
इश्क़ मेरा नाकाम ही सही पर कही तो काम आया l l
Yashraj
ना जाने किस हुनर
को शायरी कहती हो तुम
हम तो वो लिखते हैं
जो तुमसे कह नहीं पाते ....
Yashraj
चल सनम मोहब्बत करने का हुनर तुझे सिखाता हूँ
इश्क़ तुम शुरू करो निभाकर में दिखाता हूँ ।।
बहुत देता हैं तू गवाहियाँ और उसकी सफ़ाईयाँ,
समझ नहीं आता तू मेरा दिल हैं या उसका वकील..
Your voice belongs here.
Share a thought, a poem or a story with the community.
Start writing ↗