टूटा हूँ
बिखरा नहीं हूं.
हीरा हूँ- मोती हूँ साहेब!
रखते हैं...
सहेजते है...
कद्रदान धागे बदलते है
मुझे नहीं.
कांति नहीं खोई है
अंत तक न खोऊंगा
जौहरी कोई फिर पिरोयेगा.
केश में सजकर जाऊंगा
किसी गले का
हार बन जाऊंगा.
उतरा था टूटकर बिखरने को.
फिर
दिल से लग जाऊंगा.