“छलक-छलक पड़ीं आँखों की गागरें अक्सर,
सँभल-सँभल के ये पनहारियाँ नहीं चलतीं ।
जनाब-ए-'कैफ़' ये दिल्ली है 'मीर' ओ 'ग़ालिब' की,
यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं…।”
Writer’s notebook
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उठे दिल की आवाज या हक बयानी
ये फनकार की ही सदा बोलती है
फकत एक तहरीर के दम से हरदम
कलम बन के फन की ज़ुबां बोलती है

आंखे जो पढ़ ले, उसी को दोस्त मानना साहेब,
वरना....चेहरा तो हमारा रोज दुशमन भी देखते हैं....!.
"अपनों के अवरोध मिले, हर वक्त रवानी वही रही
साँसो में तुफानों की रफ़्तार पुरानी वही रही
लाख सिखाया दुनिया ने, हमको भी कारोबार मगर
धोखे खाते रहे और मन की नादानी वही रही...!"
माँग मुझ से है ख़ास दुनिया की,
लफ्ज़ मेरे हैं आस दुनिया की ,
कतरा-कतरा है शायरी मेरी ,
दरिया-दरिया है प्यास दुनिया की
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