कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी मोहब्बत करें... यहां दिल तो बहुत मिलते हैं, बस कोई दिल से नहीं मिलता...
Writer’s notebook
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इश्क जब रूह में सिमटता है...
मुस्कान बेहद हसीन हो जाती है...
संवर रही है आज वो किसी और के लिए,
पर मैं बिखरा हूँ आज भी सिर्फ उसी के लिए!
मैं इसका हनुमान हूँ
ये देश मेरा राम है
छाती चीर के देख लो
अन्दर बैठा हिन्दुस्तान है
जय हिंदी जय भारत
काश के बरस जाये यहाँ भी कुछ नूर की बारिशें
के ईमान के शीशों पे बड़ी गर्द जमी है
उस तस्वीर को भी कर दे ताज़ा
जिनकी याद हमारे दिल में धुंधली हुई है
कहीं फिसल न जाओ जरा संभल के चलना
मौसम बारिस का भी है और मोहब्बत का भी
ऐ बारिश जरा थम के बरस
जब वो आ जाये तो जम के बरस
पहले न बरस के वो आ न सके
फिर इतना बरस के वो जा न सके....
आज मौसम कितना खुश गवार हो गया
खत्म सभी का इंतज़ार हो गया
बारिश की बूंदे गिरी कुछ इस तरह से
लगा जैसे आसमान को ज़मीन से प्यार हो गया
हम भीगते हैं जिस तरह से तेरी यादों में डूबकर
इस बारिश में कहाँ वो कशिश तेरे ख्यालों जैसी
ये मौसम भी कितना प्यारा है
करती ये हवाएं कुछ इशारा है
जरा समझो इनके जज्बातों को
ये कह रही हैं किसी ने दिल से पुकारा
कट रही है जिंदगी,
रोते हुए..
और वो भी तुम्हारे,
होते हुए..!
सच है हम तेरे हैं, ढेरों सपनों के घेरे हैं।
दिल चाहे मिलना,पर मुसिबतो के फेरे हैं।
बहन ने भाई को बांधा है प्यार,
कच्चा है धागा पर रिश्ते है पक्के,
यही होते है भाई-बहन के रिश्ते सच्चे.!
साधारण सा धागा नहीं ये विश्वास की एक डोर है,
कोई तोड़ सके इसे न किसी में इतना जोर है
कौन कहता है की अंत हो जाता है हर रिश्ते का
ये वो रिश्ता है जिसका न कोई ओर न कोई छोर है।
वो सदा ख्याल रखता है उसका
और उसे सिर आँखों पर बिठाता है,
दुनिया का हर भाई अपनी बहन को
जी-जान से भी ज्यादा चाहता है।
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