ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत!!
Writer’s notebook
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सिर्फ त्यौहार न
सिर्फ राखी नहीं
हीं
भाई बहन का प्यार है ये
रक्षा का तार है ये
कलाई पर सजा के राखी
माथे लगा दिया है चंदन
सावन के पावन मौके पर
मेरी प्यारी बहना को हैप्पी रक्षा बंधन
अक्सर वही दीए हाथों को जला देते हैं,
जिसको हम हवा से बचा रहे होते हैं!
जिसे "मैं" की हवा लगी
उसे फिर ना दवा लगी
ना दुआ लगी
?जिस्म की खुशबू तो
भेड़िये भी सूंघ लेते है
और जिस्म को नोच डालते है
काश कोई ऐसा मिले जो
हमारे दिल की महक से
खींचा चला आये
जिस्म नोचने की जगह
हमारी बिखरी ज़िंदगी सवार जाए❤
क्यों घबराता है यारा दुख के होने से,
जीवन का आरंभ ही हुआ है रोने से!!
हंसी के रास्ते पर चला करो,
खुशियों की महक लिया करो,
प्यार से दिलों को छुआ करो,
जब आपका दिल उदास हो,
तो इस "स्वीट" friendको याद किया करो...
तुम करते हो किसी से मोहब्बत तो मुझे बता दो...
उसने नहीं माना तेरा प्यार तो मुझे ही जता दो....!!
करें किसका एतवार यहां
सब अदाकार ही तो है,
और गिला भी किससे करें
सब अपने यार ही तो है..!!
सुनो तुम मेरी जिद नहीं जो पूरी हो,
तुम मेरी जिंदगी हो जो जरूरी हो...!!
दिल भी न जाने किस-किस तरह ठगता चला गया,
कोई अच्छा लगा और बस लगता चला गया...!!
इंतजार किया, फिर मैंने आवाज देकर भी देखा,
बीता वक्त आया ही नहीं..!!
अजीब कहानी है इस मोहब्बत की भी,
जिसने कदर की उसे मिला नहीं,
और जिसे मिला उसने कदर की नहीं..!!
फिर से तेरी यादों का
मेरे दिल में बवंडर है..
मौसम वही, सर्दी वही
वही दिलकश दिसंबर...
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