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Dard Bhari Shayari

A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.

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986 piecesLatest published writing · Page 66
Dard Bhari Shayari
अरे उसके लिए सारी दुनिया से बगावत की थी ।। अरे याद आता है की हमने भी किसी से मोहब्बत की थी ।।उसको छोड़ कर हंसते हुए आए हम।। घर आकर इतना रोए कि हमारी आंखों ने भी हमसे शिकायत की थी।। Yashraj
Dard Bhari Shayari
ऐ समन्दर, मैं तुझसे वाकिफ हूं मगर इतना बताता हूँ, वो आंखें तुझसे ज्यादा गहरी है, जिस सनम का मैं आशिक हूँ !! Yash raj
Dard Bhari Shayari
अब क्या सुनाऊं अपनी मोहब्बत की दास्तान ये दोस्तो । उसकी चाहतो ने दीवाना बनाया , और उसकी बेबसी ने सायर।।।
Dard Bhari Shayari
हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ, दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे, ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर, जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।
Shayari by Arman
Dard Bhari Shayari
Samjhata hu khud ko ki tujhe bhool gya hu main, Samjhata hu khud ko ki aage badh gya hu main, Lekin khud se baatein karne ka jee nhi karta ab... Kyuki jab jab khud ke karib aata hu bs tujhko hi to pata hu... Tu itna kaise bas gya mujhme! Kehte hain mohabbat zismon se shuru hoti hai is jahan mein.. Lekin main to mila tak nhi tujhse.. Na kabhi chhua hai tere is zism ko! Fir kaise jud gya tu meri rooh se!!
Dard Bhari Shayari
सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से.., या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता..
Dard Bhari Shayari
एक इलाके में एक भले आदमी का देहांत हो गया लोग अर्थी ले जाने को तैयार हुये और जब उठाकर श्मशान ले जाने लगे तो एक आदमी आगे आया और अर्थी का एक पाऊं पकड़ लिया। और बोला के मरने वाले से मेरे 15 लाख लेने है, पहले मुझे पैसे दो फिर उसको जाने दूंगा। अब तमाम लोग खड़े तमाशा देख रहे है, बेटों ने कहा के मरने वाले ने हमें तो कोई ऐसी बात नही की के वह कर्जदार है, इसलिए हम नही दे सकतें मृतक के भाइयों ने कहा के जब बेटे जिम्मेदार नही तो हम क्यों दें। अब सारे खड़े है और उसने अर्थी पकड़ी हुई है, जब काफ़ी देर गुज़र गई तो बात घर की औरतों तक भी पहुंच गई। मरने वाले कि एकलौती बेटी ने जब बात सुनी तो फौरन अपना सारा ज़ेवर उतारा और अपनी सारी नक़द रकम जमा करके उस आदमी के लिए भिजवा दी और कहा के भगवान के लिए ये रकम और ज़ेवर बेच के उसकी रकम रखो और मेरे पिताजी की अंतिम यात्रा को ना रोको। मैं मरने से पहले सारा कर्ज़ अदा कर दूंगी। और बाकी रकम का जल्दी बंदोबस्त कर दूंगी। अब वह अर्थी पकड़ने वाला शख्स खड़ा हुआ और सारे लोगो से मुखातिब…
Shayari by Munna

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