Tumhare khat me naya ek Salam kis ka tha-दाग़ देहलवी
#प्रजातंत्र में #दाग़_देहलवी...तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का थातुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का थान था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का थावो क़त्ल कर के मुझे हर किसी से पूछते हैंये काम किस ने किया है ये काम किस का थावफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगेतुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का थारहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहामुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का थान पूछ-गछ थी किसी की वहाँ न आव-भगततुम्हारी बज़्म में कल एहतिमाम किस का थातमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का थाहमारे ख़त के तो पुर्ज़े किए पढ़ा भी नहींसुना जो तू ने ब-दिल वो पयाम किस का थाउठाई क्यूँ न क़यामत अदू के कूचे मेंलिहाज़ आप को वक़्त-ए-ख़िराम किस का थागुज़र गया वो ज़माना कहूँ तो किस से कहूँख़याल दिल को मिरे सुब्ह ओ शाम किस का थाहर इक से कहते हैं क्या 'दाग़' बेवफ़ा निकलाये पूछे उन से कोई वो ग़ुलाम किस का थादाग़ देहलवी