Skip to content
ShayariBooksA home for words.
5 SEP Teachers Day Quotes · A moment in words

5 SEP Teachers Day Quotes

शिक्षा का विकास प्रारंभ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी शिक्षा प्रणाली के विकास के प्रति गंभीर नहीं थी क्योकि उनका प्राथमिक उद्देश्य व्यापार करना और लाभ कमाना था| भारत में शासन करने के लिए उन्होंने उच्च व मध्यम वर्ग के एक छोटे से हिस्से को शिक्षित करने की योजना बनायीं ताकि एक ऐसा वर्ग तैयार किया जाये जो रक्त और रंग से तो भारतीय हो लेकिन अपनी पसंद और व्यवहार के मामले में अंग्रेजों के समान हो और सरकार व जनता के बीच आपसी बातचीत को संभव शिक्षा एक ऐसा शक्तिशाली औजार है जो स्वतंत्रता के स्वर्णिम द्वार को खोलकर दुनिया को बदल सकने की क्षमता रखता है| ब्रिटिशों के आगमन और उनकी नीतियों व उपायों के कारण परंपरागत भारतीय शिक्षा प्रणाली की विरासत का पतन हो गया और अधीनस्थ वर्ग के निर्माण हेतु अंग्रेजियत से युक्त शिक्षा प्रणाली का आरम्भ किया गया| प्रारंभ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी शिक्षा प्रणाली के विकास के प्रति गंभीर नहीं थी क्योकि उनका प्राथमिक उद्देश्य व्यापार करना और लाभ कमाना था| भारत में शासन करने के लिए उन्होंने उच्च व मध्यम वर्ग के एक छोटे से हिस्से को शिक्षित करने की योजना बनायीं ताकि एक ऐसा वर्ग तैयार किया जाये जो रक्त और रंग से तो भारतीय हो लेकिन अपनी पसंद और व्यवहार के मामले में अंग्रेजों के समान हो और सरकार व जनता के बीच आपसी बातचीत को संभव बना सके| इसे ‘निस्पंदन सिद्धांत’ की संज्ञा दी गयी| शिक्षा के विकास हेतु ब्रिटिशों ने निम्नलिखित कदम उठाये- शिक्षा और 1813 का अधिनियम • चार्ल्स ग्रांट और विलियम विल्बरफोर्स,जोकि मिशनरी कार्यकर्ता थे ,ने ब्रिटिशों पर अहस्तक्षेप की नीति को त्यागने और अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार हेतु दबाव डाला ताकि पाश्चात्य साहित्य को पढ़ा जा सके और ईसाईयत का प्रचार हो सके| अतः ब्रिटिश संसद ने 1813 के अधिनियम में यह प्रावधान किया की ‘सपरिषद गवर्नर जनरल’ एक लाख रुपये शिक्षा के विकास हेतु खर्च कर सकते है और ईसाई मिशनरियों को भारत में अपने धर्म के प्रचार-प्रसार की अनुमति प्रदान कर दी| • इस अधिनियम का इस दृष्टि से महत्व है कि यह पहली बार था जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में शिक्षा के विकास हेतु कदम उठाया | • राजा राममोहन राय के प्रयासों से पाश्चात्य शिक्षा प्रदान करने के लिए ‘कलकत्ता कॉलेज’ की स्थापना की गयी | कलकत्ता में तीन संस्कृत कॉलेज भी खोले गए| जन निर्देश हेतु सामान्य समिति,1823 इस समिति का गठन भारत में शिक्षा के विकास की समीक्षा के लिए किया गया था| इस समिति में प्राच्यवादियों का बाहुल्य था,जोकि अंग्रेजी के बजाय प्राच्य शिक्षा के बहुत बड़े समर्थक थे |इन्होने ब्रिटिश सरकार पर पाश्चात्य शिक्षा के प्रोत्साहन हेतु दबाव डाला परिणामस्वरूप भारत में शिक्षा का प्रसार प्राच्यवाद और अंग्रेजी शिक्षा के भंवर में फंस गयी |अंततः मैकाले के प्रस्ताव के आने से ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का स्वरुप स्पष्ट हो सका| लॉर्ड मैकाले की शिक्षा प्रणाली,1835 • यह भारत में शिक्षा प्रणाली की स्थापना का एक प्रयास था जिसमें समाज के केवल उच्च वर्ग को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रदान करने की बात थी| • फारसी की जगह अंग्रेजी को न्यायालयों की भाषा बना दिया गया | • अंग्रेजी पुस्तकों की छपाई मुफ्त में होने लगी और उन्हें सस्ते दामों पर बेचा जाने लगा | • प्राच्य शिक्षा की अपेक्षा अंग्रेजी शिक्षा को अधिक अनुदान मिलने लगा | • 1849 में बेथुन ने ‘बेथुन स्कूल’ की स्थापना की | • पूसा (बिहार) में कृषि संस्थान खोला गया | • रुड़की में इंजीनियरिंग संस्थान खोला गया| वुड डिस्पैच ,1854 • इसे ‘भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा’ कहा जाता है क्योकि इसमें भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए समन्वित योजना प्रस्तुत की गयी| • इसमें जनता में शिक्षा के प्रसार की जिम्मेदारी राज्य को सौंपने की बात कही गयी| • इसने शिक्षा के एक पदानुक्रम का प्रस्ताव दिया-सबसे निचले स्तर पर वर्नाकुलर प्राथमिक स्कूल, जिला स्तर पर वर्नाकुलर हाईस्कूल और सम्बद्ध कॉलेज ,और कलकत्ता, मद्रास व बम्बई प्रेसिडेंसी के सम्बद्ध विश्वविद्यालय | • इसने उच्च शिक्षा हेतु अंग्रेजी माध्यम और स्कूल शिक्षा के लिए देशी भाषा (वर्नाकुलर) माध्यम की वकालत की| हंटर आयोग(1882-83) • इस आयोग का गठन डब्लू.डब्लू.हंटर की अध्यक्षता में 1854 के वुड डिस्पैच के तहत विकास की समीक्षा हेतु किया गया था| • इसने प्राथमिक और सेकेंडरी शिक्षा में सुधार व प्रसार में सरकार की भूमिका को महत्व दिया | • इसने शिक्षा के नियंत्रण की जिम्मेदारी जिला और म्युनिसिपल बोर्डों को देने की बात कही| • इसने सेकेंडरी शिक्षा के दो रूपों में विभाजन किया –विश्विद्यालय तक साहित्यिक;वाणिज्यिक भविष्य हेतु रोजगारपरक शिक्षा |

A conversation in words

0 comments

Log in to join the conversation.