तुम्हें मालूम था यह राह नहीं निकलती जहाँ पहुँचना मैंने तुम उस तरफ जा भी नहीं रहे थे फिर भी तुम चलते रहे मेरे साथ-साथ… - पद्मा सचदेव
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