नेह लगा तो नैहर छूटा , पिया मिले बिछुड़ी सखियाँ रे ! उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे !! देखा जो ससुराल पहुंचकर , तो दुनिया ही न्यारी थी ! फूलों सा था देश हरा , पर कांटो की फुलवारी थी !!!
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