जंजीर कभी तड़का-तड़का, तकदीर जगाई थी हमने ! हर बार बदलते मौसम पर, उम्मीद लगाई थी हमने !! जंजीर कटी, तकदीर खुली, पर अभी ये अंखिया प्यासी है ! तेरा प्यार कहाँ जाकर बरसे, हर घाट गगरिया प्यासी है !!
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