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Hindi Shayari · A moment in words

Hindi Shayari

1.माँ तेरी याद सताती है मेरे पास आ जाओ थक गया हूँ मुझे अपने आँचल में सुलाओ उँगलियाँ फेर कर बालों में मेरे एक बार फिर से बचपन की लोरियाँ सुनाओ2 2.खुदा की रहमत है हम पर जो उनका प्यार मिला जन्नत से हसीन कई यादो का उपहार मिला क्यों करे हम उस खुदा से अब कोई शिकवा कोई गिला जिसने हमको माँ का प्यार दिलाया जिसको पाकर मैं और तू खिला 3.क्यों भूल जाते है हम उस माँ को वक़्त के साथ साथ नहीं रहता हमको उनका कोई ख्याल क्या होता होगा उस माँ के दिल का हाल जिसने हमारे लिए भुला दिया अपना हर एक ख्वाब 4.क्यों ख्याल नहीं रहता हमको उनका वो तो बस हर पल हमारी याद करती है जब भी जाती है किसी मंदिर या मस्जिद में सबसे पहले हमारी सलामती की दुआ करती है 5.क्या वजूद होगा हमारा जो हम उनको भूल जाये फिर कभी तन्हाई में हम खुद को ही तड़पाये रोये हम बेहिसाब कोई आंसू पौंछने ना आये खुद को युही कोसते रहे और बस पछताए 6.मेरी गलतियों को माफ़ कर देती है बहुत गुस्से में होती है तो भी प्यार देती है होठों पे उसके हमेशा दुआ होती है ऐसी सिर्फ़ और सिर्फ माँ होती है 7.माँ तो जन्नत का फूल है प्यार करना उसका उसूल है दुनिया की मोहब्बत फिजूल है माँ की हर दुआ कबूल है माँ को नाराज करना इंसान तेरी भूल है माँ के कदमो की मिटटी जन्नत की धुल है 8.मुझे चाँद कहती थी माँ सदा चूमती रहती थी माँ मैं खुश रहूँ इसलिए सारे दुःख सहती थी माँ होती थी सर्दी बहुत मगर मेरे कपडे धोती थी माँ 9.माँ की ममता कौन भुलाये कौन भुला सकता है वो प्यार किस तरह बताऊ कैसे जी रहे है हम तू तो बैठी परदेश में गले तुझे कैसे लगाऊँ लेकिन भेज रहा है प्यार इस एस मेस में तेरा बेटा मेरी प्यारी माँ 10.लोग कहते है दुःख बुरा होता है जब आता है तो रुलाता है मगर हम कहते है की दुःख अच्छा होता है जब भी आता है तो कुछ ना कुछ सीखा जाता है1 11.आँख खोलू तो चेहरा मेरी माँ का हो आँख बंद हो तो सपना मेरी माँ का हो मैं मर भी जाऊं तो भी कोई गम नहीं लेकिन पर कफ़न मिले तो दुपट्टा मेरी माँ का हो 12.माँ तेरे दूध का हक़ मुझसे अदा क्या होगा तू है नाराज तो खुश मुझसे खुदा क्या होगा 13.अपने बच्चों को मुस्कुराता देख मुस्कुराती है माँ दर्द हो मुझे कोई तो अश्क़ आँखों से बरसाती है माँ 14.माँ तो माँ होती है बच्चों में इसकी जान होती है चार दीवारी मकान को घर बना कर सजाती है माँ 15.थाम कर ऊँगली मेरी मुझ को हर कदम पर चलना सिखाया आज भी गिरता हु कहीं तो सबसे पहले उठाती है माँ1 16.माँ की गोद में सर रख लू तो एक सकून सा मिलता है खुद परेशान हो तो सबसे हाल – ऐ -दिल अपना छुपाती है माँ

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