"फसल नहीं हुई"
क्या करूं की मेरी मेहनत सफल नहीं हुई,
कि इस बार भी खेत में वो फसल नहीं हुई ।
बिन बात भी जलते थे कुछ लोग मुझसे,
पर इस बार किसी को कोई जलन नहीं हुई ।
लोग हिसाबे जमाना बदलते गए लिबाज़ अपने,
पर हमसे कभी किसी की नकल नहीं हुई ।
यूं तो कोशिशें बहुत की जिंदगी में हमने,
पर जिंदगी अपनी फिर भी सरल नहीं हुई ।
वो तो पूंछ लेते हैं मेरा हाल आज भी दोस्तों से,
पर उनकी जिंदगी में हमसे कभी दखल नहीं हुई ।
कोई भी घोल कर पी जाए ऐसा मुमकिन नहीं है,
हालत पतली है पर इतनी भी तरल नहीं हुई ।
यूं तो रोज डसते है आस्तीन के सांप मुझको,
पर मुझे अब भी समझ इसां की असल नहीं हुई ।
पड़ गई है झुर्रियां जिम्मेदारी निभाने में,
वरना जवानी में हमारे इतनी भी ढलन नहीं हुई ।
क्या किया क्या न किया ये तो याद नहीं मुझको,
पर फलक पे जाने की उम्मीद अभी दफन नहीं हुई ।
छोड़ो नफरतें कि अभी प्यार की जरूरत है,
याद रख कि जिंदगी किसकी यहां कफ़न नहीं हुई ।
"प्रवीण"
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