Skip to content
ShayariBooksA home for words.
Love Shayari · A moment in words

Love Shayari

खुशियों की दामन में आँसू गिराकर तो देखिये, ये रिश्ता कितना सच्चा है आजमा कर तो देखिये, आपके रूठने से क्या होगी मेरे दिल की हालत, किसी आइने पर पत्थर गिराकर तो देखिये।

A conversation in words

8 comments
Ajay vishwakarma Ajay

खुशियों की दामन में आँसू गिराकर तो देखिये,
ये रिश्ता कितना सच्चा है आजमा कर तो देखिये,
आपके रूठने से क्या होगी मेरे दिल की हालत,
किसी आइने पर पत्थर गिराकर तो देखिये।

Ajay vishwakarma Ajay

wow

Ajay vishwakarma Ajay

nice

Ajay vishwakarma Ajay

हाथ से बीतते हुए लम्हों को कैसे रोकूँ,
जो मुकद्दर-ए-ज़िन्दगी है उसे कैसे टोकूं,
खुदा न करे कि ऐसा लम्हा आये,
जो सारी ख्वाहिशों को संग ले जाए,
इजाज़त बस खुदा से इतनी चाहिए,
जितनी भी ज़िन्दगी है बस तेरी याद में बीत जाये।
तेरे बिना भी क्या ज़िन्दगी,
चलती तो हवाएं भी हैं,
तेरे बिना क्या ज़िन्दगी,
बदलते तो रुख भी हैं,
फर्क बस इतना सा है,
कि हवाओं और रुख का मोड़ होता है,
मैं तो यूँ भी तेरे बिना बेवजह हूँ।
राह चलते तो हजारों मुसाफिर मिलते हैं,
ज़िन्दगी में तो कई मुसाफिर अपने बनते हैं,
अपनों और गैरों में भी बहुत फर्क होता है,
कुछ पास होके भी दूर हैं,
कुछ दूर होके भी दिल के सबसे करीब हैं।

Ajay vishwakarma Ajay

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है,
तन्हाई में शहर बसाया करता है,
कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात,
दीवारों को दर्द सुनाया करता है,
रो देता है आप ही अपनी बातों पर,
और फिर खुद को आप हंसाया करता है।

Ajay vishwakarma Ajay

यूं आये जिंदगी में कि ख़ुशी मिल गई,
मुश्किल राहों में चलने की वजह मिल गई,
हर एक लम्हा खुशनुमा बना दिया,
मेरी उम्मीद को नई मंजिल मिल गई।

Ajay vishwakarma Ajay

इश्क़ में खुद को गिरफ्तार तो होने दो,
अपने जिस्म पे मेरा इख्तियार तो होने दो,
मोहब्बत यूँ ना ठुकराओं मेरी ये नाइंसाफी है,
मुकम्मल तो होने दो, अभी बाकी है।
मेरे प्यार को जरा तैयार तो होने दो,
मेरी हदों को जरा सा पार तो होने दो,
अब तलक तुमने मेरी हद कहाँ नापी है,
मुकम्मल तो होने दो, अभी बाकी है।
ठीक से अभी आँखों को चार तो होने दो,
मेरे इश्क़ का जुनून खुद पे सवार तो होने दो,
दिल की गहराइयों में अब तलक तू कहाँ झाँकी है,
मुकम्मल तो होने दो, अभी बाकी है।
तुमहारी पलकों को मेरा इंतज़ार तो होने दो,
भीतर से हाँ बाहर से इंकार तो होने दो,
मेरी तन्हाइयों ने बस तेरी ही राह ताकी है,
मुकम्मल तो होने दो, अभी बाकी है।
अपना दिल मेरी ओर फ़रार तो होने दो,
ज़माने की नज़रों में मुझे गुनहगार तो होने दो,
इश्क़ करना ग़र है गुनाह तो माफ़ी है,
मुकम्मल तो होने दो, अभी बाकी है।

Ajay vishwakarma Ajay

भंवर से निकलकर किनारा मिला है,
जीने को फिर से एक सहारा मिला है,
बहुत कशमकश में थी ये ज़िंदगी मेरी,
उस ज़िंदगी में अब साथ तुम्हारा मिला है। प्रतिमा जी यह आपके लिए अजय की तरफ से

Log in to join the conversation.