धूप मेरे सर पर है मंजिल तुम्हारे पास है मसला मेरा है लेकिन हल तुम्हारे पास है बादल बनकर मैं आज आसमां पर छा गया
जिससे मैं बादल बना वो जल तुम्हारे पास है......
हिल रहा था पानी का #कलश
कीचड़ से सनी उसकी देह पर
भीगे आँचल से झलकते अंग
जैसे हमारी सभ्यता का शव हो!
कभी गाये थे उसने कलश की
पवित्र गरिमाओं के गीत
अँजुरी मे भर मंत्र की तरह,
और इन सभ्यताओं ने सुनी थी
ओस की टप टप को संगीत में
चमकते, गरजते, बरसते हुए
भीगी रातों में पानी की धज को!
करम प्रधान विस्व करि राखा।
जो जस करई सो तस फलु चाखा।।
ईश्वर ने कर्म (Deed) को ही महानता दी है। उनका कहना है कि जो जैसा कर्म (Work) करता है उसको वैसा ही फल मिलता है।
II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
“मैं उनसे आज तक कभी पाया नहीं गया,
जानॉं ! जो मेरे शौक़ के आलम मिले तुम्हें !
यूँ हो कि कोई और ही हव्वा मिले मुझे,
हो यूँ कि कोई और ही आदम मिले तुम्हें..!”