Latest Shayari

Zara allaah ki shaan to dekho Ke allaah ke aagey panch waqt sajda karne wale banda Ek na namaazi na farmaan bande ke aagey chand tukdon ke liye jholi phailate hai

बचपन लिखा तो बचपना याद आ गया , जख्म लिखा तो खून आ गया , कैसे बताऊं दोस्त कि तुम्हारी याद नहीं आती , "द" लिखा तो दोस्ती का सैलाब आ गया.....✍️ *~~भाई का छोटा भाई~*

Posted On: 26-02-2021

Tere dil ke sabhi iraadon se chla jaunga... Chehra bhi bhul jaoge mera, Saare vaadon se chla jaunga... Musafir hoon, Teri yaadon se bhi chla jaunga...

मुझे भी हुई है मोहब्बत , मै कभी इंकार नहीं किया , मैं किसी के दिल से नहीं , मोहब्बत हिंदुस्तान से किया..... ✍️ ~भाई का छोटा भाई

मॉ बाप बच्चों को पैरों पर खड़ा करते रह गए, इसी मे माँ बाप के घुटने जवाब दे गए....✍️ *~~भाई का छोटा भाई~*

जब तक घर में था तो ठीक था मै , जब से शहर आया तब से मै "मैं" न रहा.....📝 *~~भाई का छोटा भाई~*

मेरी बातें दुनिया को बहुत चुभती है ना एक दिन खामोश हो जाऊंगा , फिर पढ़ते रहना खामोशिया और करते रहना मेरी तारीफ , मैं चुपके से मर जाऊंगा.....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

मेरी छुट्टी की तारीख खुद क्या खुदा को भी नहीं पता , गांव तो जाऊंगा पर तारीख का मोहताज नहीं , मॉ मैं भी घर आऊंगा कल पर आज नहीं.....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

Abhi abhi to jawaani ki dahleez par pahla kadam rakha hai abhi se rota hai kya Aage ki soch dekh aage hota hai kya

मां तो आखिर मां होती है , बातें करते करते पता नहीं कहां खो जाती है , तुमको क्या लगता है दोस्त.... कि मां को तुम्हारा कमरा सजाना और तुम्हारे लिए खाना बनाना ही अच्छा लगता है , अरे मां भी कभी लड़की थी दोस्त और दुनिया कि हर लड़की की तरह मॉ को भी तारीफ सुनना अच्छा लगता है.....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

वक़्त हर वक़्त को बदल देता है सिर्फ वक़्त को थोड़ा वक़्त तो दो !!

दिनांक 18/02/2021 गुरूवार ~भाई का छोटा भाई मैं जीवन के उस दौर में हू जहाँ कभी-कभी मुझे स्वयं को पहचानना मुश्किल हो जाता है।मैं ठीक हूँ या कैसा हूँ?मुझसे पूछने वाला कोई नहीं हैं। इन अंधेरों से कब तक निकलूँगा यह मुझे मालूम नहीं, पर उम्मीद करता हूँ कि मरने के पहले सब कुछ ठीक हो जाएगा। अब किसी से मोह नहीं रह गया, खुद से भी नहीं.... 📝

याद तो मेरी सबको आती है , पर सिर्फ जरूरत पड़ने पर....✍️ ~जख्मी बंदा