Latest Shayari

Posted On: 15-08-2021

Posted On: 15-08-2021

मैं तारीफ तारीफ करता था उसकी बिंदी की ! मेरे लफ्ज कम पड़ गए जब उसने झुमके पहन लिए !!

यूँ दर-ब-दर भटकना अच्छा नही ग़ालिब तुम्हे कौनसा इस शहर में पहचान बनानी है

Posted On: 09-08-2021

Posted On: 09-08-2021

अकेले ही खुश है खिताब हमे आशिक़ मिजाज ना दे, चली जा रही हूं अपनी तनाहियो से बात करता है इश्क मुझे पीछे से आवाज ना दे

Posted On: 08-08-2021

मानव का रचा हुया सूरज मानव को भाप बनाकर सोख गया। पत्‍थर पर लिखी हुई यह जली हुई छाया मानव की साखी है ~ अज्ञेय ("हिरोशिमा")

Posted On: 08-08-2021

तुम्हें मालूम था यह राह नहीं निकलती जहाँ पहुँचना मैंने तुम उस तरफ जा भी नहीं रहे थे फिर भी तुम चलते रहे मेरे साथ-साथ… - पद्मा सचदेव

Posted On: 02-08-2021

Posted On: 02-08-2021

Posted On: 02-08-2021