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मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे, हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे हम मिलजुल के रहे ऐसे की मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे.

Posted On: 19-08-2017

इतने बुरे नही थे, जितने इल्जाम लगाए लोगों ने,, कुछ मुकद्दर खराब था, कुछ आग लगाई लोगो ने !!

Posted On: 19-08-2017

तेरे ना होने से जिंदगी में बस इतनी सी कमी रहती है,, मैं चाहे लाख मुस्कुराऊ, आँखों में नमी सी रहती है !! :( सांस तो चलती रहती है मेरी ब-दस्तूर ,, ये धड़कने ही कुछ थमी थमी सी रहती है !!

Posted On: 19-08-2017

मैं इस उम्मीद में डूबा कि तू बचा लेगा, अब इससे ज्यादा तू मेरा इम्तिहान और क्या लेगा ,,

धरती में होगी हरियाली | जीवन में होगी खुश हाली || पेड़ पौधे लगाइये | धरती को सुरक्षित करिये ||

बहन से कलाई पर राखी तो बँधवा ली, 500 रू देकर रक्षा का वचन भी दे डाला! राखी गुजरी, और धागा भी टूट गया, इसी के साथ बहन का मतलब भी पीछे छूट गया! फिर वही चौराहों पर महफिल सजने लगी, लड़की दिखते ही सीटी फिर बजने लगी! रक्षा बंधन पर आपकी बहन को दिया हुआ वचन, आज सीटियों की आवाज में तब्दील हो गया ! रक्षाबंधन का ये पावन त्यौहार, भरे बाजार में आज जलील हो गया !! पर जवानी के इस आलम में, एक बात तुझे ना याद रही! वो भी तो किसी की बहन होगी जिस पर छीटाकशी तूने करी !! बहन तेरी भी है, चौराहे पर भी जाती है, सीटी की आवाज उसके कानों में भी आती है! क्या वो सीटी तुझसे सहन होगी, जिसकी मंजिल तेरी अपनी ही बहन होगी? अगर जवाब तेरा हाँ है, तो सुन, चौराहे पर तुझे बुलावा है! फिर कैसी राखी, कैसा प्यार सब कुछ बस एक छलावा है!! बन्द करो ये नाटक राखी का, जब सोच ही तुम्हारी खोटी है! हर लड़की को इज़्ज़त दो , यही रक्षाबंधन की कसौटी है!

Posted On: 15-08-2017

पत्नी:- तुम मुझसे कितना प्यार करते हो ? पति:- 72% पत्नी:- 100% क्यों नही?? पति:- 28% तो GST है ना पगली, लक्ज़री आइटम पर।

Posted On: 15-08-2017

संता और बंता दोनों भाई एक ही क्लास में पढ़ते थे। अध्यापिका: तुम दोनों ने अपने पापा का नाम अलग-अलग क्यों लिखा? संता: मैडम फिर आप कहोगे नक़ल मारी है, इसीलिए।

न मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना है तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुपट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए!!!

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मर मिटने वालों का बाकी यही निशां होगा अनेकता में एकता ही इस देश की शान है, इसीलिए मेरा भारत महान है हमारी पहचान तो सिर्फ ये है कि हम भारतीय हैं !!!!

मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

न पूछो ज़माने को, क्या हमारी कहानी है, हमारी पहचान तो सिर्फ ये है, की हम सिर्फ हिन्दुस्तानी हैं ......!!!

मेरा "हिंदुस्तान" महान था, महान है और महान रहेगा, होगा हौसला बुलंद सब के ड़ों में बुलंद तो एक दिन पाक भी जय हिन्द कहेगा.

लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि, मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा