Khabar marne ki jab aaye to yeh na samajhna hum dagebaaz the.. Kismat ne gum itne diye, bas zara se pareshan the..
बेशक तू बदल ले अपनी मौहब्बत लेकिन ये याद रखना,, तेरे हर झूठ को सच मेरे सिवा कोई नही समझ सकता!!
मर्जी से जीने की बस ख्वाहिश की थी मैंने, और वो कहते हैं कि खुदगर्ज़ बन गए हो तुम.
किसी ने पूछा कौन याद आता है अक्सर तन्हाई में, हमने कहा कुछ पुराने रास्ते, खुलती ज़ुल्फे और बस दो आँखें.
दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.
तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.
फिर नही बसते वो दिल जो एक बार उजड् जाते है, कब्रे जितनी भी सजा लो पर जिँदा कोई नही होता.
रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा, तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी.
मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर जरा सम्भल के, ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए.
इरादा कत्ल का था तो ~मेरा सर कलम कर देते, क्यू इश्क मे डाल कर तुने ~हर साँस पर मौत लिख दी.
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का, बड़ी सादगी से कहते है मजबूर थे हम.
लुट लेते है अपने ही वरना, गैरों को कहां पता इस दील की दीवार कहां से कमजोर है.
जिस जिस ने मुहब्बत में, अपने महबूब को खुदा कर दिया, खुदा ने अपने वजूद को बचाने के लिए, उनको जुदा कर दिया.
क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब, ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने.
रोक देना मेरी मैय्यत को उसके घर के सामने ! लोग पूछे तो कह देना की कनधे बदल रहे है !!
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