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Poetry · 4 chapters

Munna Yadaw

Chapter 1

मेरा ये दिल है तेरा ठिकाना MERA YE DIL HAI TERA THIKANA

मेरा ये दिल है तेरा ठिकाना ज़हन के हर एक ख़याल में तुम,
निगाह में भी तुम्ही बसे हो, जुबां के हर एक सवाल में तुम। 
तुम्हारे गीतों की गुनगुनाहट अभी भी कानों में गूंजती है ,
हो राग गौरी की स्वर लहर में, हो राग भैरव की ताल में तुम। 
हो दूर मुझसे हबीब लेकिन तुम एक पल को जुदा नहीं हो,
है रात रानी में तेरी ख़ुश्बू , कँवल के रंग-ओ-जमाल में तुम। 
मैं अपने सीने पे रख के सोता हूँ अब तलक वो तेरा दुपट्टा,
वही दुपट्टा जो भूल कर के गए थे आख़िर विसाल में तुम। 
ये सारी नज़्में, तमाम ग़ज़लें, तेरे ख़यालों का आइना हैं ,
हर एक मिसरे में तेरी यादें हर एक लफ्ज़-ए-कमाल में तुम। 
कोई भी आहट कहीं भी हो तो लगे है जैसे तू आ गया है ,
गए हो आशिक़ को छोड़कर के कुछ ऐसे दीवाने हाल में तुम।