उन भारत के गद्दारों को बस एक सबक सिखाते।
जिस सभा में की थी उन्होने के विभाजन की बात
उसी समय उसी सभा में उनका शीश काट गिराते।
Writer’s notebook
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न जाने क्यों आज कल तुम इतने खफा होते जा रहे हो।
बफा तो बहुत देखी थी मैंने तुम्हारे अन्दर
पर न जाने क्यों तुम इतने बेबफा होते जा रहे हो।
मैने तुझे चांहा था तेरे प्यार के समंदर में डूबकर।
जिन्दगी का हर ख्वाब अधूरा सा रह गया
तेरा साथ छूटकर ।
लोग तो यूं ही कहा करते है
कि हर मर्ज की दवा मिल जाती है।
लेकिन मै कैसै मान लूं कि वो सीसा जुड जायेगा
जो कल टूटा था भरी महफिल में
उसके हाथों ्से छूट कर
Usne kuch aise dil toda mera bhari mahfil mein
Ki koi aawaj bhi na hui
Our tukde bhi be misal ho gaye
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