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Desh Bhakti Shayari

A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.

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96 piecesLatest published writing · Page 2
Desh Bhakti Shayari
सुधर जा ऐ पाकिस्तानी... वर्ना नक्शे से मिट जाएगा , हिन्दुस्तान जिंदाबाद ... तेरा रोम रोम चिल्लाएगा , तेरी आने वाली पीढ़ी मेरे मुल्क की तलवे चाटेगी ... मत उलझना हिन्दुस्तानी से तेरी मरी मां भी डाटेगी !
Desh Bhakti Shayari
सुधर जा ऐ पाकिस्तानी वर्ना नक्शे से मिट जाएगा .... हिन्दुस्तान जिंदाबाद तेरा रोम रोम चिल्लाएगा ....
Desh Bhakti Shayari
अर्खुब भरे दर्द ज़मानें रह गए... हम ईंशानीयत का फर्ज निभाने में रह गए , तुम सब चुपके से आकर हमारे घर में आग लगाते रहे ... और हम तुम्हारे ही घर कि आग बुझाने में रह गए !
Desh Bhakti Shayari
क्यो मरते हो दफा 302 के लिए अरे मरना ही है तो मरो अपने इस वतन के लिए जिस पर ये भारत देश ओढा देगा तिरंगा तुम्हारे कफन के लिए ।
Desh Bhakti Shayari
हम मरते नही तुम जैसी सनम बेवफा के लिए अरे मरना ही होगा तो मै मरूँगा अपने इस वतन के लिए जीसपर तुम जैसी लड्कीया अपना रूपट्टा ओढा देंगी हमारे कफन के लिए ।
Desh Bhakti Shayari
ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई , मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता , नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई , मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता
Desh Bhakti Shayari
खूब बहती है, अमन की गंगा बहने दो… मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो… लाल हरे रंग में ना बाटो हमको… मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो
Desh Bhakti Shayari
खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं, मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं, करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों, तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है
Desh Bhakti Shayari
कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की मान का है, हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है
Desh Bhakti Shayari
कर जस्बे को बुलंद जवान तेरे पीछे खड़ी आवाम हर पत्ते को मार गिरायेंगे जो हमसे देश बटवायेंगे
Desh Bhakti Shayari
तैरना है तो समंदर में तैरो नालों में क्या रखा हैं, प्यार करना है तो देश से करो औरों में क्या रखा हैं
Desh Bhakti Shayari
मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ, यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ
Desh Bhakti Shayari
ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये
Desh Bhakti Shayari
मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए बस अमन से भरा यह वतन चाहिए जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

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