Desh Bhakti Shayari

Desh Bhakti Shayari, देश भक्ति शायरी, Desh Bhakti Suvichar, Desh Bhakti Quotes

Shayari Books provides free platform for individuals to write and read desh bhakti poem in hindi, desh bhakti kavita in hindi, desh bhakti shayari in hindi, desh bhakti slogan in hindi, kumar vishwas desh bhakti shayari in hindi, short desh bhakti poem in hindi, desh bhakti shayari hindi, poem on desh prem, desh bhakti ki kavita hindi mai, desh bhakti chutkule, desh bhakti hindi kavita, desh bhakti suvichar, desh bhakti chutkule, desh bhakti hindi kavita, bhakti sms hindi, bharat mata ki shayari, azadi ki shayari, watan ki shayari, desh bhakti kahani, desh bhakti quotes in english, shaheed shayari in hindi, indian shayari in hindi, desh bhakti bhashan and express their tallent to the world.

अब तक खून नहीं खौला ओ खून नहीं पानी है जो देश के काम ना आय ओ बेकार जवानी है

एक सैनिक ने क्या खूब कहा है... किसी गजरे की खुशबु को महकता छोड़ आया हूँ, मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ, मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ, मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ। जय हिन्द.

धन भी रखते है, गन भी रखते है, और_सुन बेटा ब्राह्मण पंडित है, थोड़ा हटके रर्इयो वरना, ठोकने का ज़िगर भी रखते है..!!

लड़ें वो बीर जवानों की तरह, ठंडा खून फ़ौलाद हुआ, मरते-मरते भी की मार गिराए, तभी तो देश आज़ाद हुआ.

जो अब तक ना खौला वो खून नही पानी हैं, जो देश के काम ना आये वो बेकार जवानी हैं.

This country will remain the home of the liberated only, as long as we make it the land of the brave. Happy Independence Day.

इश्क तो करता है हर कोई, महबूब पे मरता है तो हर कोई, कभी वतन को महबूब बना कर देखो तुझ पे मरेगा हर कोई ..........!!!

कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है, हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिंदुस्तान की शान का है.

न मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना है तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुपट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए.

मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए बस अमन से भरा यह वतन चाहिए जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये….

कैसे कह दूँ की सरकार गुनाहगार नहीं है...क़ातिल है मगर हाथों मे तलवार नहीं है कितने घरों के चिराग बुझ गये एक पल में...ऐसे जुर्म पे भी हुकूमत शर्मसार नहीं है।

Bharat Mata Teri Gatha, Sabse Unchi Teri Shaan, Tere Age Sheesh Jhukaye, De Tujhko Hum Sab Samman!