मैंने तुझे बच्चे की तरह पाला है
मेरा बाप मत बन जाना
मुझे डस कर सांप मत बन जाना
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
Words for every feeling
Share your writing ↗Inspirational Shayari
A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.
जिसे तू धड़कन समझ ता है
वोह की और के दिल की रानी है
तू जिसका दीवाना है
वोह किसी और की दीवानी है
तू उसके लिए बेगाना है
वोह तेरे लिए बेगानी है
ये प्यार प्यार नहीं धोका है
ये प्यार प्यार नहीं नादानी है
चल कहीं और क़िस्मत आजमानी है
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
ना हिन्दू पाक है ना मुसलमान शुद्ध है
अरे धर्म के नाम पर ये कैसी युद्ध है
लड़ने मरने वाले भूखे नंगे गरीब
और लड़ाने वाले अमीर धनवान समृद्ध है
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
नेताओं के फोटो देश के कोने कोने
तक पहोच गए
पर उनके मदद के हाथ
उनके पड़ोसियों तक भी नहीं पहोच पाए
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
ये इंसानों की बस्ती है
यहां इन्सान रहते है
तू इसे हिन्दू या मुसलमान
के इलाके ना बना
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
बादशाह और शहेनशाह भी डरते है
उनको भी डर लगता है
तू फ़कीर बन फ़कीर को कैसा डर
फकीरा किसी से घबराता नहीं है
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
जब ना कोई आरज़ू ना कोई खौईश
ना कोई तमन्ना
तब हालात से क्या घबराना
मुसीबत से क्या डरना
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
कोई क्या जाने क्या हो जाएगा
कौन से पल
हर एक मुलाक़ात को तू
आखरी मुलाक़ात समझ के चल
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
कोई राजा तो कोई फ़कीर
सब की अपनी क़िस्मत अपना नसीब
सब का अपना मुकद्दर अपनी तकदीर
कोई राजा तो कोई फ़कीर
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
दुनियां में आया हैं तो
दुनियां के रित रिवाज के साथ चल
जैसे जैसे वक़्त बदलता हैं
वैसे वैसे तू भी बदल
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
जात ना पूछ आदमी की
धर्म ना पूछ इंसान का
अपने आप का गुरु बन जा
गराक ना बन
धर्म मजहब की दुकान का
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
वक़्त मुझसे खेलता रहा
मै वक़्त से खेलता रहा
हम दोनों ज़िन्दगी भर
एक दूसरो से खेलते रहे
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
अभी तो असली मंजिल मिलना बाकी है,
अभी तो इरादों का इम्तिहान बाकी है।
अभी तो तोली है मुट्ठी भर जमीन,
अभी तो पूरा आसमान तोलना बाकी है.......✍️
✨जरूरी नहीं कि हर सुंदर इमारत अजूबा हो।
जीतने की खुशी वहीं जानता है,,
जो हार के समुंदर में बार-बार डूबा हो।✨
Yaad hai mujhe wo darad bahara safar..!
Jab koi bhi saath na tha, apno ki nahi thi khabar..!
Humnai tuab bhi himmat na haari saamana kya,
Aaj kat raha hai khushi mai zindagi ka safar..!
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