आंखे है उनकी या है शराब का मेहखना, देख कर जिनको हो गया हूँ मै दीवाना, होठ है उनके या है कोई रसीला जाम, जिनके एहसास की तम्मना मे बीती है मेरी हर शाम......!!!
मैं पिए रहुं या न पिए रहुं, लड़खड़ाकर ही चलता हु, क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हैं….!!!
हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला, होश तब आया जब उस ने कहा कि खुदा किसी एक का नहीं होता.......!!!
पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी, डगमगाना भी ज़रूरी है संभलने के लिए.......!!!
या खुदा 'दिल' तो तुडवा दिया तूने इश्क के चक्कर में, कम से कम 'लीवर' तो संभालना दारु पीने के लिए.......!!!
सिगरेट के साथ बुझ गया सितारा शाम का, मयखाने पुकारे.. ग्लास की उम्र होने आई है….....!!!
ऐ शराब !! मुझे तुमसे मोहब्बत नही, मुझे तो उन पलों से मोहब्बत है, जो तुम्हारे कारण, मै दोस्तौ के साथ बिताता हूँ…...!!!
तुम्हारी आँखों की तौहीन है जरा सोंचो, तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है.........!!!
शायरी इक शरारत भरी शाम है, हर सुख़न इक छलकता हुआ जाम है, जब ये प्याले ग़ज़ल के पिए तो लगा मयक़दा तो बिना बात बदनाम है….....!!!
किसी ने ग़ालिब से कहा, सुना है जो शराब पीते हैं उनकी दुआ कुबूल नहीं होती, ग़ालिब बोले: "जिन्हें शराब मिल जाए उन्हें किसी दुआ की ज़रूरत नहीं होती".....!!!
सुना है मोहब्बत कर ली तुमने भी, अब किधर मिलोगे, पागलखाने या मैखाने…...!!!
ना ज़ख्म भरे, ना शराब सहारा हुई, ना वो वापस लौटे, ना मोहब्बत दोबारा हुई.......!!!
नशा हम किया करते है इलज़ाम शराब को दिया करते है, कसूर शराब का नहीं उनका है जिनका चहेरा हम जाम मै तलाश किया करते है…..!!!
बहकने के लिए तेरा एक खयाल काफी है, हाथो मे हो फ़िर से कोई जाम ज़रूरी तो नही......!!!
शराब और इश्क़ कि फितरत एक सी है, दोनों में वही नशा, वही दिलकशी, एक दिन तौबा करो उनसे, दुसरे दिन फिर वही दीवानगी, फिर वही खुदखुशी.....!!!
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