तनख्वाह कम थी ,
और घर की जिम्मेदारियां ज्यादा दिखी ,
यूं ही नौकरी नहीं छोड़ा उसमें ,
रिजाइन मारते वक्त ,
उसने अपनी एक -दो प्रॉब्लम लिखी,
बोस को उसकी प्रॉब्लम नहीं दिखी ,
रिजाइन एक्सेप्ट कर लिया ,
ये भी नही पढ़ा कि उसने बात क्या लिखी,
बोस को भी समझना चाहिए बंदे की बात को ,
ऐसे ही थोड़ी न सबके सामने बयां करेगा वो अपने जज़्बात को ,
यूं ही नौकरी नहीं छोड़ा उसमें ,
रिजाइन मारते वक्त ,
उसने अपनी एक -दो प्रॉब्लम लिखी,
क्योकि उसको घर की जिम्मेदारी ज्यादा दिखी,
राधे सर बहुत मिस करूंगा हम आपको ,
बॉस नहीं समझा तो क्या हुआ ,
मैं समझ रहा हूं आपकी जज़्बात को,
ज्यादा नहीं लिख रहा हूं ,
यह मैसेज पहुंचाना अपने बॉस को ,
कुछ तो समझे बोस बंदे की बात को ,
मैं भाई का छोटा भाई इसीलिए मैसेज लिख रहा हूं रात को....✍️
*~भाई का छोटा भाई*
Words for every feeling
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A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.
मैं ही हमेशा कहूं
तुम भी कह दो कभी ,
हमेशा मैं ही मनाऊं
तुम भी मुझे मनाओ कभी ,
रिश्तों मैं नोक झोंक चलती रहती है
तुम यू न छोड़ कर जाओ कभी ,
जो कभी गलत करू तो
तुम भी समझाओ कभी ,
हमेशा मैं ही निभाऊ
तुम भी रिश्ता निभाओ कभी ,
हमेशा तो मैं ही लिखता रहता हूं
पढ़कर तो सुनाओ तुम कभी ,
झूठ ही सही ,
पर प्यार जताओ तो कभी ,
मुझे भी अच्छा लगता है तारीफ सुनना
मेरी तारीफ में कुछ बताओ कभी ,
बेशक मैं बुरा हूं पर रिश्ता अच्छे से निभाता हूं
यही तो बताओ कभी ,
क्या जरूरत है झूठी अफवाह फैलाने की
दुनिया को सच सच बताओ कभी ,
मैं लिखने को तो पूरा जहां लिख दूं
पर यह दुनिया मेेरा लिखा पढ़े कभी ,
सब मुझे अच्छा बोले
मैं इतना भी तो नहीं हूं सही ,
मोहब्बत मे नहीं टूटा हूं मैं
जो आप लोग तारीफ ना करो मेरी कभी ,
मैं भाई का छोटा भाई
कविता लिखता हूं कभी-कभी...✍️
~भाई का छोटा भाई
sadime raxawal


motihari

raxawal partime

Delhi to patna

Meri zindagi ke har ek kisse ko
Aaj kitab samjh ke padh rahe hai woh ..
?बुरे हैं ह़म तभी ?तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो ?द़ुनिया ?ज़ीने नही देती. !!!!?

बहुत देखा है ज़िन्दगी में समझदार बनकर पर ख़ुशी हमेशा पागल बनकर ही मिली है।

दिलो के मिलने का मौसम है दूरियां मिटाने का मौसम है होली का त्यौहार ही ऐसा है रंगो में डूब जाने का मौसम
नहीं थका हूं नहीं थकूगा जन सेवा मेरा धर्म है जिंदगी के आखिरी सांस तक जन सेवा करता रहूंगा।

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है इस धरती की बेचैनी को सिर्फ बादल समझता है

हम क्या?है वो सिर्फ?हम जानते हैं
लोग सिर्फ हमारे बारे में ?अंदाजा लगा सकते है

jalane wale jalte rahe mera gadi badate rahe

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