धूप मेरे सर पर है मंजिल तुम्हारे पास है मसला मेरा है लेकिन हल तुम्हारे पास है बादल बनकर मैं आज आसमां पर छा गया
जिससे मैं बादल बना वो जल तुम्हारे पास है......
जीने का मन नहीं करता ,
मैं मौत को एक बार लिखूं ,
मन करता है खून पिला कर
कलम से अंगार लिखूँ ,
अपने ही खून से मैं ,
अपनी समस्याओं को तमाम लिखूं ,
अपने अल्फाजों में ,
दो चार शब्द हर रोज लिखू ,
शरीर के हर जख्म मे
अपनो का व्यापार लिखू ,
इस जख्म भारे शरीर को ,
अंग का तार तार लिखू ,
किस्मत को हम क्यू कोशु,
अपना हि मैं सार लिखू ,
फिर से अपनी बर्बादी के
मातम को इक बार लिखूँ ,
बहुत परेशान हू ज़िन्दगी से
मौत को अपना हार लिखू ,
अपने अल्फाजों से मैं ,
अपने दोस्तों का प्यार लिखू,
इतने मुश्किल जीवन में
उम्मीदों का व्यापार लिखूँ ,
अपनी चलती सॉसो के पीछे
मॉ बाप का प्यार लिखू ,
हर चीख समेट शब्दों में
पीड़ा को इस बार लिखूँ ,
बहुत परेशान हूं जिंदगी से ,
मौत को अपने यार लिखू,
इन शब्दो के कल्प-पुष्प
से अपना अंतिम हार लिखू,
उठा के अपना शीश गगन
से अपने ज़िन्दगी का सार लिखू ,
मैं भाई का छोटा भाई
पन्नों में इतिहास लिखू....✍️
~भाई का छोटा भाई