दिल ने कहा भी था मत चाह उसे यू पागलो की तरह,
कि वो मगरूर हो जायेगा तेरी बेपनाह मुहब्बत देखकर।
Words for every feeling
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A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.
कतरा कतरा मे नाम तेरा लिख दिया
लहर लहर मे तेरी सूरत दर्शा दी
जो उखाड़ना है उखाड़ले बारिश की बौछारे
मिट्टी के मकान मे रहकर मैंने अपनी मुहब्बत बरसा दी।
मुहब्बत होंठों से नहीं, उनसे निकली मीठी बातों से है..
क्यों कि मासूमियत चेहरे से कहीं ज्यादा, उसकी भोली आँखों में है।
नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है,
मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है,
कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों,
सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है..!!
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ,
जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना !
मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है,
हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना !!
Jise Mene Pyar Kiya
Wo Kabhi Meri Na Huyi
Wo Chor Gayi Mujhe Kisi Aur K Liye
Wo Chor Gayi Mujhe Kisi Aur K Liye
Usne V Chor Diya Ushe
Usne V Chor Diya Ushe
Kisi Aur K Liye
#SAGAR_R
#BOXER?✍️
इश्क़ की गहराइयों में खूबसूरत क्या है
मैं हूं, तुम हो और किसी की जरूरत क्या है
ऐसे मत देख पगली ÐiL हार जाएगी
बस अब और मत देख वरना Mummy से मार खाएगी
प्यार की बात भले ही करता हो जमाना...
मगर प्यार आज भी "मां" से शुरू होता है...
मेरे इश्क़ के चर्चे बहुत होंगे
पर अफ़सोस तेरा जिक्र न होगा।
हम होंगे तन्हाइयों में
पर तुझे खोने का कोई गम न होगा।
तू बेशक़ होगी हूर ज़माने की
पर तेरे नसीब में फिर कोई महफ़िल न होगा।
हम तो यू ही खमोश होंगे ज़नाज़े पर
पर ज़माने में रौशन हमारा इश्क़ होगा।।
उन भारत के गद्दारों को बस एक सबक सिखाते।
जिस सभा में की थी उन्होने के विभाजन की बात
उसी समय उसी सभा में उनका शीश काट गिराते।
न जाने क्यों आज कल तुम इतने खफा होते जा रहे हो।
बफा तो बहुत देखी थी मैंने तुम्हारे अन्दर
पर न जाने क्यों तुम इतने बेबफा होते जा रहे हो।
मुस्कुराओ क्या गम है,
जिंदगी में टेंशन किसको कम है,
अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है,
जिंदगी का नाम ही.. कभी खुशी कभी गम है!!
पूरी दुनिया जीत सकते है
संस्कार से… और….
जीता हुआ भी हार जाते है,
अहंकार से…!!
*_अब मुनासिब है घर बना लूँ अपने दर्मियां अपने दिल-ए-सवालात का।
तबियत इज़ाजत नही देती मुझे गुफ्तगू करने की।।।
कब्र-ए-गाह दफन ए जुस्तजू आलम-ए-मरहम नसीव नही होता।
दफन हो जाती बहुत सी ख्वाहिशे पर याद न आना हर किसी के नसीव नही होता।।
वो शायर।।।।_*
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