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Posted On: 24-01-2021

जिसे "मैं" की हवा लगी उसे फिर ना दवा लगी ना दुआ लगी

Nazdikiyon se rishton mein duriya aa gayi hai Iss sard o suhane mausam mein bhi talkhiyan aa gayi hai

क्या लिखूं मैं अपने अल्फाज में , जब इंसानियत ही नहीं रही इंसान मे, क्या इनको नहीं दिखती गांव घर की मां बहन बेटियां , तो आखिर इनके घर कौन बनाता है रोटिया , क्या लिखूं मैं इंसानों के बारे में , मेरी कलम शर्म से डर गई, जैसे मैं इंसान लिखा तो खुद म खुद , मेरी कलम लिखदी की इंसानियत तो मर गई, क्या लिखूं मैं अपने अल्फाज में , जब इंसानियत ही नहीं रही इंसान मे, परिया निकली नहीं घर से कि बाज पैर मारने लगते है , ये जल्लाद मां बहन बेटियों को ताडने लगते हैं, मै भगवान से रोज यही प्रार्थना करता हूं , कि किसी मॉ बहन बेटियों की इज्जत पर आंच ना आए , बेशक दो चार जल्लाद बेमौत मर जाए , क्या लिखूं मैं अपने अल्फाज में , जब इंसानियत ही नहीं रही इंसान मे, मै भाई का छोटा भाई लिख तो रहा हूं पर शायर नहीं हू , और किसी मां बहन बेटियो के ईज्जत पर , कोई किचड़ उछाले और मैं चुप खड़ा रहूं इतना बड़ा कायर तो नहीं हू , क्या लिखूं मैं अपने अल्फाज में , जब इंसानियत ही नहीं रही इंसान मे, आप सब से हाथ जोड़कर विनती है, कि संभाल कर रखना अपनी फूल जैसे औलाद को, ये जल्लाद बेऔलाद बैठे हैं ,इनको क्या कहूं जिनको शर्म ही नहीं, ये शर्म को घोल कर पी बैठे हैं , मैं ये इसलिए नहीं लिख रहा हूं कि आज है 24 जनवरी , बल्कि इसलिए लिख रहा हूं की हर रोज दम तोड रही अपनी एक परी, क्या लिखूं मैं अपने अल्फाज में , जब इंसानियत ही नहीं रही इंसान मे, क्यू कर रहे हो जल्लादों हम सब को बिबस , आंसू आ गए कैसे बताऊं कि आज है बालिका दिवस, क्या लिखूं मैं अपने अल्फाज में , जब इंसानियत ही नहीं रही इंसान मे.....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

Lakh ibadat kar le par maa ki seva nahi ki toh Khuda ko khush karne layak koi kaam nahi kya

Maa ki dua uske sab bachchon ke saath hoti hai Par uske sab bachche khush naseeb nahi hote koi bad naseeb bhi hota hai

Maa ki kadar nahi jisko woh bad naseeb hota hai Khud apni hi zindagi ka dushman khud apna hi raqeeb hota hai

Aaj maa nahi bas maa ki yaad hai Wohi meri manzil thi wohi meri buniyaad hai

Zindagi apni marzi se nahi chalti hai Tu zindagi ki marzi se chal na sikh le

Main apni marzi ka kuch nahi karta tha Jab Maa thi tab main maa ki hi sunta tha

मेरी कितनी अजीब कहानी है, ये जिंदिगी दर्द की दीवानी है....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

Khuda khud hum se kabhi kabhi razaa mangta hai Duniya par rob jamane ke liye hum se hamari adaa mangta hai

Praishchit toh woh kare jisne khuda ke naam se dhoka diya ho Hum ne toh khud khuda se hi dhoka khaya hai

Hum kahaan khuda ko yaad karte baithe Hum to wo hai jise khuda khud yaad karta rahta hai

Naam mein hi toh sab kuch rakha hai naam se hi toh adami ki pahchan hai Woh jhoot kahta hai joh ye kahta hai ke naam mein kya rakha hai

Zindagi gar tere saath guzari hoti Toh woh zindagi bhi kya zindagi hoti