पूछते है लोग मुझसे ये अल्फाज़ कहाँ से लाता हूँ, बहते है रोज जो आंसू मेरे, मै उन्ही को लिखते जाता हूँ हो गया हूँ मै भी बस एक चाक के जैसा, लिखते है वो कहानी अपनी और मिटता मै चला जाता हूँ एक दिन वो था ढूंढ लिया था मैंने खुदा अपना एक दिन ये है,मै खुद को भी नहीं ढूंढ़ पाता हूँ समझने लगे है अब तो वो खुद को खुदा जैसे, हाँ वही,सामने जिसके मै सर अपना झुकाता हूँ
जो खेलोगे सम्मान से तुमको काट देगे आरी से, जो खेलोगे सम्मान तुमको काट देंगे आरी से। आदर्श केशरी से टकराने वाले मारे जाएंगे बारी बारी से।।
Kudrat ki taraskgi badi he diwani hai, Kahi behti Saba, kahi jharno ki pani hai. Barf ki chadar me lipti parwate, ye kudrat har mor pe banati hume diwani hai yaha Sehar ki baat he kuch roohani hai, shama e aftab alag suhani hai. muntazir na bno warna bekar ye zindagani hai.
( जाम पे जाम पीने से क्या फायदा सुबह तक तो सारी उतर जायेगी )...2 हमने तो आपकी आंखों से पी है खुदा कसम सारी उम्र नशे में गुजर जायेगी
alok kumar
Bewafa Shayri
वो बात ही कुछ अजीब थी वो हमसे रुठ गई जो दिल के सबसे करीब थी उसने तोड़ दिया दिल हमारा और लोग कहते हैं कि वो लड़की बहुत शरीफ थी
कुछ लोग दिल पर ऐसा असर कर जाते है। टूटे शीशे में भी पूरे नजर आते है । मिलते है कुछ पल के लिए और जिंदगी भर के लिए दिल में उतर आते है।।
क्या खबर कौन था ओ और मेरा क्या लगता था । क्या खबर कौन था ओ और मेरा क्या लगता था । जो उससे मिल कर हर शख्स बुरा लगता था।
मैं था बालक अंजाना सा वो थी जानी पहचानी सी सफर कब गुजर गया बातो में वो लड़की थी कोई रानी सी
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