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ये सब पैसे की महेरबानी है मेरे यारों जो लोग झुक झुक कर सलाम करते है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

ये दुनियां क्या है मौत का नगर है यहां आदमी का अंजाम या तो चिता है या तो कबर है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

Posted On: 21-07-2020

किसि रोज हम जरूर मिलेङ्गे गलिके किसि मोडपे जरूर मिलेङ्गे ईस जनममे नहि मिलपाए हम पर दुसरे जनममे हम जरूर मिलेङ्गे ।।

ज़िन्दगी बिखर गई हैं यहां वहां मै उसे समेट कर रखूं तो रखूं कहां फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

हर तरफ धुआ धुआं हो रहा है कहीं चिताएं जल रही है कहीं जनाज़ें उठ रहे है दुनिया में ये क्या हो रहा है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

दुनिया का ये अच्छा खेल रचा है तुन तेरी तरह ही बनाए है तूने एक से बढ़कर एक नमुने फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

आय ख़ुदा तेरा ये क्या नाटक है मै भी देखता हूं जान में जान जहां तक है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

अमीरों पर खज़ाने लूटता है गरीबों को अंगूठा दिखता है और ख़ुद को ख़ुदा ख़ुदा कहलाता है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

बाज़ार में आग लगी है हर चीज़ हो गई है महंगी बस आदमी हो गया सस्ता उठा ज़िन्दगी के बस्ता और पकड़ मौत का रास्ता फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

कोई नेता से अभिनेता बन गया कोई अभिनेता से नेता जनता को कुछ नहीं देता जनता से ही सब कुछ लेता फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

मुझे डोज़ख़ से मत डराओ मेरे यारों मैंने दुनिया देखी है दुनिया से बड़े कोई दोज़ख़ कहीं हो ही नही सकती फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

तू मुझे उड़ता हुआ परिंदा नजर आता है अंदर से तू मर चुका है बस ऊपर से ज़िंदा नज़र आता है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

महनत से भी मिलेगा उतना ही नसीब में लिखा जितना है उंठ हाथी घोड़े डूब गए गधा पूछता है पानी कितना है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

फूलों से है वोह नाजुक पत्थर से है वोह सख़्त आदमी है मोंम के और अंगार है वक़्त फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

मै समझ गया के मै इस दुनिया में क्यों आया हूं मै अपने अज़ीज़ों के जनाज़ों को कांधा देने के लिए आया हूं फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)