Latest Shayari

बचपन में साहित्य की पहली dose ही प्रेमचंद जी की कहानियों से मिली।दो बैलों की कथा,रूठी रानी,निर्मला,गोदान पढ़कर यूँ लगता है जैसे ये कहानियां मेरे अपने गाँव की हों!जब भी हामिद के चिमटे की कहानी “ईदगाह” सुनाता हूँ तो एक अजीब सुकून सा मिलता है। पाँव में फटे जूते से झाँकते अंगूठे वाली तस्वीर में भी चमकदार मुस्कुराहट दुनिया के किसी भी भाषा के साहित्यकार की इकलौती तस्वीर होगी जिसकी रचनाओं ने प्राइमरी से पीएचडी तक का सफर किया हो,, आदरणीय प्रेमचंद जी शत शत नमन 🙏🏻🙏

Ek anokhi ahsash hai jindgi, Bahut hi mushkil mukam hai jindgi. Kho mat jana yaro apno ke bhid me, Kyoki, mitti ka ham par bahut hi ahshan hai jindgi.....

Posted On: 29-07-2020

Apna HANSI Kisi K Piche Barbad Mat Karo Apna HANSI Kisi K Piche Barbad Mat Karo Yeh Duniya Hai SAHAB Log To Insan K DIL Se Khel Jate Hai Kambakht Yeh HANSI Kya Chize Hai Apne HANSI Ke Malik Khud Bano Warna Rulane Wale Bahut Hai #SAGAR_R #BOXER🥊✍️

Posted On: 28-07-2020

ओ रात गमो कि रात थी, जिस रात रुखसत उनकी बारात थी। उठ जाते है आज भी नींद से, की एक गैर कि बाहों में अपनी सारी कायनात थी।।

पूरी दुनिया आशा लगाए तेरे तरफ ही देख रहा | कि तू बदलेगा जीवन उनका पर तू थक के घुटने टेक रहा!! सुन ! सुन मेरी एक बात, :- जो तुझे महसूस अपने कांधे पर हो रही पीड़ा है| यह पीड़ा नहीं असंख्य लोगों के जीवन बदलने की बीड़ा है|| क्या अभी भी तू कहेगा कि तू थका है | मैंने तेरे अंदर हमेशा एक जलता ज्वाला देखा जो ना रुका था और ना रुका है||

यह आसमा यह धरती यह हवाएं और यह मंजर सब चीख चीख कर कह रहे हैं कि कब तुम पिता का कर्ज चुकाओगे!! और मां बैठी है देहरी पर कि मेरा लाल आएगा जीवन बदल जाएगा ऐसा करके कब अपनी मां को दिखाओगे!!

तू ही बता, क्या लिखूं आग लिखूं कि पानी लिखूं या लहरों की रवानी लिखूं!! मैं तो बेहतरी और बदलाव चाहता हूं इसीलिए सोचता हूं कि आने वाली पीढ़ी के लिए कुर्बान अपनी जवानी लिखूं!!

Posted On: 28-07-2020

मेरे हुजरे में नहीं कहीं और रख दो, आसमा लाए हो- आसमा लाए हो, ले आओ जमीन पर रख दो। अब कहां ढूंढने जाओगे हमारे कातिल, मेरे कत्ल का इल्जाम आप हमी पर रख दो। मैंने जिस ताख पर कुछ टूटे दिए रखेहैं, चांद तारों को भी उसी पर रख दो|

Posted On: 28-07-2020

चोर उचक्का की करो कद्र, पता नहीं कौन कब किस सरकार में आ जाए।

Posted On: 27-07-2020

Hshnankgsnna

अय बदनसीबी तू कहीं और जाकर अपने खेल खेल तुझे खट खटाने के लिए क्या मेरे ही घर का दरवाज़ा दिखता है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA) Aye badnaseebi tu kahin Aur jakar apne khel khel Tujhe khat khata ne ke liye Kya mere hi ghar ka darwaaza dikhta hai FAKEERA THE FAKIR BADSHAH SAAB

Kuch tuney diye Kuch maine kamaye Kuch duniya ne mujhe Bante hai Aye zindagi tere daman Sirf kante hi kante hai FAKEERA THE FAKIR BADSHAH SAAB

Tu mujhe udta hua parinda Nazaar ataa hai Andar se tu mar chuka hai Upar se zinda nazar aata ha FAKEERA THE FAKIR BADSHAH SAAB

Zindagi bikhar gayi hai Yahaan wahaan Main usey samet kar Rakhun to rakhun kahaan FAKEERA THE FAKIR BADSHAH SAAB

Posted On: 27-07-2020

पहिलो दोस्त हुए, दोस्त से जान हुए। जान से अनजान हुए, और जिंदगी आगे वढ़ गयी। -NicyLiky