मैंने आंसू को समझाया, भरी महफ़िल में ना आया करो, आंसू बोला, तुमको भरी महफ़िल में तन्हा पाते है, इसीलिए तो चुपके से चले आते है….!!!
जाते जाते उसने पलटकर इतना ही कहा मुझसे, मेरी बेवफाई से ही मर जाओगे या मार के जाऊँ.....!!!
तेरी मुहब्बत भी किराये के घर की तरह थी, कितना भी सजाया पर मेरी नहीं हुई….!!!
जब हुई थी मोहब्बत तो लगा किसी अच्छे काम का है सिला, खबर न थी के गुनाहों कि सजा ऐसे भी मिलती है....!!!
खुदा से भी पहले तेरा नाम लिया है मैंने, क्या पता तुझे कितना याद किया है मैंने, काश सुन सके तू धड़कन मेरी, हर सांस को तेरे नाम से जिया है मैंने........!!!
यूँ नज़रें वो नीचे किए चले जा रहें हैं, पास आशिक़ खड़े यूँ परेशाँ हुए जा रहें हैं, कोई कहता है ज़ालिम अपनी नज़र तो उठा, हम तेरे रूख का दीदार करने को मरे जा रहें हैं.......!!!
गम ना कर ज़िंदगी बहुत बड़ी है, चाहत की महफ़िल तेरे लिए सजी है, बस एक बार मुस्कुरा कर तो देख, तक़दीर खुद तुझसे मिलने बाहर खड़ी है….....!!!
लोग पूछते हैं की तुम क्यूँ अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं करते, हमने कहा जो लब्जों में बयां हो जाये, सिर्फ उतना हम किसी से प्यार नहीं करते….......!!!
सब कुछ मिला सुकून की दौलत ना मिली, एक तुझको भूल जाने की मोहलत ना मिली, करने को बहुत काम थे अपने लिए, मगर हमको तेरे ख्याल से फुर्सत ना मिली.....!!!
आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ, एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में.........!!!
वो बार बार पूछती है कि क्या है मौहब्बत, अब क्या बताऊं उसे, कि उसका पूछना और मेरा न बता पाना ही मौहब्बत है......!!!
आँखों में ना हमको ढूंढो सनम, दिल में हम बस जाएंगे, तमन्ना है अगर मिलने की तो, बंद आँखों में भी हम नज़र आएंगे........!!!
नदी को सागर से मिलने से ना रोको, बारिस की बूंदों को धरती से मिलने से ना रोको, जिन्दा रहने के लिए तुमको देखना जरुरी है, मुझे तुम्हारा दीदार करने से ना रोको…...!!!
छुपा लूंगा तुझे इस तरह से मेरी बाहों में, हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे, हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह, कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे.....!!!
चलो सिक्का उछाल के कर लेते हैं फैसला आज, चित आये तो तुम मेरे और पट आये तो हम तेरे.....!!!
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