Bewafa Shayari

Posted On: 27-07-2017

नादान इनकी बातो का एतबार ना कर, भूलकर भी इन जालिमो से प्यार ना कर, वो क़यामत तलक तेरे पास ना आयेंगे, इनके आने का नादान तू इन्तजार ना कर!

Posted On: 27-07-2017

मेरी चाहत ने उसे खुशी दे दी, बदले में उसने मुझे सिर्फ खामोशी दे दी, खुदा से दुआ मांगी मरने की लेकिन, उसने भी तड़पने के लिए जिन्दगी दे दी!

Posted On: 27-07-2017

दिल का दर्द एक राज बनकर रह गया, मेरा भरोसा मजाक बनकर रह गया, दिल के सोदागरो से दिललगी कर बैठे, शायद इसीलिए मेरा प्यार इक अल्फाज बनकर रह गया।

Posted On: 27-07-2017

मुस्कुराते पलको पे सनम चले आते हैं, आप क्या जानो कहाँ से हमारे गम आते हैं, आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते है।

Posted On: 27-07-2017

रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने, कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने, हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो, अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।

Posted On: 27-07-2017

मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना, भूल जाना मेरा ख्याल ना करना, हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे, पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!

Posted On: 27-07-2017

वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी, मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी, उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना, वो नादान है यारो.. अपना हाथ जला लेगी।

Posted On: 27-07-2017

आज हम उनको बेवफा बताकर आए है, उनके खतो को पानी में बहाकर आए है, कोई निकाल न ले उन्हें पानी से.. इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है।

Posted On: 27-07-2017

प्यार करने का हुनर हमें नहीं आता, इसलिए प्यार की बाज़ी हम हार गए, हमारी ज़िन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था, सायद इसलिए हमे ज़िंदा ही मार गए!

वो दिल ही क्या.. तेरे मिलने की.. जो दुआ न करे.. मैं तुझ को.. भूल के.. ज़िंदा रहूँ.. ख़ुदा न करे

वो हुस्न ही क्या जो बिक जाये बाजारो में, इश्क के साज पर बाजार बिका करते है। ऐक आदत सी पड गयी है खरीदने की हमें, ओर भी कुछ है जहाँ ताज भुका करते है।।

Meri chahte tumse alag kb h dil ki bate tumse chupi kb h tum sath rho dil me dhadkan ki jgah fir jindgi ko sanso ki jarurt kb h

Posted On: 15-02-2017

कोई आँखों में रहती है तो कोई बांहें बदलती है, मुहब्बत भी सियासत की तरह राहें बदलती है...

Posted On: 04-02-2017

लाओ, वो गिरवी रखी मेरी नींदे वापस कर दो, महोब्बत नहीं दे सकते तो कीमत क्यूँ वसूलते हो

Posted On: 25-10-2016

ज़माने के तो गम सुलझा रहा हूँ, मगर मैं खुद उलझते जा रहा हूँ ! ये दुनियां कब किसी को मानती हैं, मैं अपने आप को मनवा रहा हूँ !! ये क्या दिन आ गए हैं जिंदगी में, मैं अपने आप से ऊबता रहा हूँ ! ओ धोका दे तो उसकी क्या खता हैं, खता मेरी हैं के धोका खा रहा हूँ !!!