दिल-ऐ -ग़म गुस्ताख़ फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया कोई वीरानी सी वीरानी है . दश्त को देख के घर याद आया
आंखे जो पढ़ ले, उसी को दोस्त मानना साहेब, वरना....चेहरा तो हमारा रोज दुशमन भी देखते हैं....!.
Mohabbat mein koi shart naa hoti hai ye toh pata tha hamein.. Bass iss baat se bekhabar reh gaye.. Zyda chahne wale ki kadar bhi naa hoti hai ismein!! Gaus!
इरादतन नहीं तोड़ा ये जानता हूँ मैं लेकिन मेरे अपनों ने मुझे तोड़ा भी बहुत है. तोड़ा भी बहुत है... लेकिन मेरे अपनो नें... चलता रहा मैं धूप में संग संग जिनके रास्तों में तनहा अपनों ने छोड़ा भी बहुत है. छोड़ा भी बहुत है... लेकिन मेरे अपनो ने..
सोंच रहा था आऊँ... पर कैसे? लेकिन तुम आवाज़ देते रहना जब जब मेरी याद आये जब भी मौका मिले चाहे जैसे. जिस दिन टकरा जाएगी तुम्हारी पुकार बाधाओं की जंजीर से, टूट जाएंगे बंधन
एक सैनिक ने क्या खूब कहा है... किसी गजरे की खुशबु को महकता छोड़ आया हूँ, मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ, मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ, मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ। जय हिन्द.
बहनों की मोहब्बत की है अज़्मत की अलामत राखी का है त्यौहार मोहब्बत की अलामत
जो पानी से नहायेगा वो सिर्फ लिबास बदल सकता है… लेकिन जो पसीने से नहायेगा वो इतिहास बदल सकता है…
शब्दों की ताकत को कम मत आंकिये… साहेब क्योकि छोटा सा “हाँ” और छोटा सा “ना” पूरी जिंदगी बदल देता है।
* क्या हम यह नहीं जानते कि आत्म सम्मान आत्म निर्भरता के साथ आता है? अब्दुल कलाम
* शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का।
* प्रतीक्षा करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है जितना प्रयास करने वाले छोड देते है * किसकी को पराजित करना बहुत आसान है परंतू उसे जीतना उतना ही दुष्कर
मूर्ख खुद को मूर्ख समझे तो प्रतिभाशाली बन सकता है, परन्तु प्रतिभाशाली खुद को प्रतिभाशाली समझे तो मूर्ख बन सकता है
टूटा हूँ बिखरा नहीं हूं. हीरा हूँ- मोती हूँ साहेब! रखते हैं... सहेजते है... कद्रदान धागे बदलते है मुझे नहीं. कांति नहीं खोई है अंत तक न खोऊंगा जौहरी कोई फिर पिरोयेगा. केश में सजकर जाऊंगा किसी गले का हार बन जाऊंगा. उतरा था टूटकर बिखरने को. फिर दिल से लग जाऊंगा.
न मालूम राहें कौन सी थी किधर किधर गया हूँ मैं बच के चला तौहमतों से अपनी नज़रों में गिर गया हूँ मैं रास्ते बड़े कठिन हैं सुनता आया हूँ मैं ज़मानों से पर पसार उड़ चला हूँ बात करता हूँ आसमानों से कबूतरों सी रही उड़ान मेरी बाजों से घिर गया हूँ मैं बच के चला तौहमतों से अपनी नज़रों में गिर गया हूँ मैं
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