Life Quotes

Posted On: 21-08-2020

Zindgi. Zindgi k khel bde ajeeb hote hai... Kbhi kbhi insaan jeet k bhi Sb kuch haar jata hai......

Posted On: 18-08-2020

सुना है हिसाब माँगते हो आओ बैठो कर देते हैं। बढ़ गई है शायद दिलों में बहुत नफ़रत सामने आओ थोड़ी और भर देते हैं। वो शायर

Posted On: 18-08-2020

अपने ही दिये जखम भर रहा हूं मैं क्या बताऊँ किसी को की आजकल क्या कर रहा हूं मैं। फैसला मेरा है इसलिए शिकायत नहीं है किसी से मुझे अपने आप से ही रह रह कर गुजर रहा हूं मैं। जरूरत नहीं है अब किसी के साथ की,मिजाज ए बारिश का रुख जानता हूं पानी की तरह पल पल बह रहा हूं मैं। ईलम नहीं है मुझे गजल ए वफ़ा लिखने का ना जाने क्या-क्या कह रहा हूं मैं। बस जानता हूं आवाज ए बयान की गुफ्तगू इसलिए कुछ नया कर रहा हूं मैं। वस अब और बर्दाश्त नहीं होता यह सोच सोच कर रोज अपने आलम ए दासताँ का घर भर रहा हूं मैं। न जाने आजकल क्या कर रहा हूं मैं, न जाने आजकल क्या कर रहा हूं मै। वो शायर

Posted On: 01-08-2020

कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम, आज उनकी जय बोल. जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल कलम, आज उनकी जय बोल. पीकर जिनकी लाल शिखाएँ उगल रही सौ लपट दिशाएं, जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल कलम, आज उनकी जय बोल. अंधा चकाचौंध का मारा क्या जाने इतिहास बेचारा, साखी हैं उनकी महिमा के सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल कलम, आज उनकी जय बोल.

ज़िन्दगी बिखर गई हैं यहां वहां मै उसे समेट कर रखूं तो रखूं कहां फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

तू मुझे उड़ता हुआ परिंदा नजर आता है अंदर से तू मर चुका है बस ऊपर से ज़िंदा नज़र आता है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

कुछ तूने दिए कुछ मैंने कमाए कुछ दुनिया ने मुझे बांटे है आय ज़िन्दगी तेरे दामन में सिर्फ कांटे ही कांटे है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

सफर ज़िन्दगी का तन्हा तन्हा है चारों तरफ मेला ही मेला है इतनी सारी भीड़ मै भी इंसान अकेला अकेला है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

मै ज़िन्दगी से ज़िन्दगी मुझसे बेज़ार हो गई है मेरा जिस्म नहीं मेरी रूह बीमार हो गई है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

ज़िन्दगी ने ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी को उलझा दिया मौत आयी मौत ने ज़िन्दगी की हर उलझन को सुलझा दिया फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

उड़ उड़ के कितना उड़ेगा अय आदमी तेरी उड़ान भी तो एक हद मै है चलते चलते कभी भी कहीं भी रुक जाती है ज़िन्दगी भी तो मौत की ज़द में है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

अय ज़िंदगी तेरे चेहरे पर एक मुस्कान की खातिर बहोत आंसू बहाए है मेरी आंखों ने फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

खौईशे बे सबर सी है दुआयें बे असर सी है हर पल की फिकर सी है ज़िन्दगी मुक्तसर सी है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)

मेरे आज़ाद जिस्म को क़ैद ए रूह मत देना बड़ी मुश्किल से काटी है साजा ए ज़िन्दगी मैंने फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)

मै ज़िन्दगी से ज़िन्दगी भर लड़ा ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जीता ने के लिए पर ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी से हार ही गई एसी आंधी चली मेरी ज़िंदगी में के मेरी ज़िन्दगी से मेरे ज़िन्दगी की बहार ही गई ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी से हार ही गई फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)