Beautiful Shayari

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कोई नहीं है मेरे दिल के करीब, इतनी बड़ी दुनिया और मैं इतनी गरीब!

यादों के उन लम्हों को भूलाऊं कैसे दिल के कैमरे से तस्वीरों को मिटाऊं कैसे आती है जब याद तो तड़पता है दिल पर इस नासमझ दिल को समझाऊं कैसे.. Er. P Ranjan

जहां गुंजाइशें है, वही हर रिश्ता ठहरता है! अजमाइशें अक्सर रिश्ते तोड़ देती है!

जिनको मैंने जन्नत मानी है उसने मेरे लिए मन्नत मांगी है

मैने तुझे चांहा था तेरे प्यार के समंदर में डूबकर। जिन्दगी का हर ख्वाब अधूरा सा रह गया तेरा साथ छूटकर । लोग तो यूं ही कहा करते है कि हर मर्ज की दवा मिल जाती है। लेकिन मै कैसै मान लूं कि वो सीसा जुड जायेगा जो कल टूटा था भरी महफिल में उसके हाथों से छूट कर...!!

कोशिश करते रहें, हार हो या जीत... जीत गए तो मीत है हार गए तो प्रीत...

खुदा तेरा इंसाफ भी बहुतों को खटकता है, कोई भूखा, कोई आशिक, आखिर क्यों भटकता है..?

हर सांस सज़्दा करती है, हर नज़र में इबादत होती है... वो रूह आसमानी होती है, जिस दिल में मुहब्बत होती है...!!

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है, मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है, कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों, सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है..!!

प्यार की बात भले ही करता हो जमाना... मगर प्यार आज भी "मां" से शुरू होता है...

मुस्कुराओ क्या गम है, जिंदगी में टेंशन किसको कम है, अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है, जिंदगी का नाम ही.. कभी खुशी कभी गम है!!

Posted On: 18-08-2020

बहुत शिद्द्तों से बने आशियां की दीवारे-ए-दर्मिन्यां की दरारे भरने चला था मैं। मसरूफ इतना था की पता ही नही चला की कब दिवार मेरे उपर गिर गयी। अब न दर रहा न रही दिवार ओर ना ही रही कोई दरार। रहा सिर्फ दर्द,ज़खम वस ज़खम Vo shayar

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूं हैं

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं