Beautiful Shayari

Dost mile bichad gaye.. Us waqt main raste badal gaye... Badalti sawarti thi kismat roj meri... Un dinoon baarish hoti thi dost Meri.. Beega kar jo mere aansoo chupa jati thi.. Wo dost meri 12/06/16, 23:29

Dost mile bichad gaye.. Us waqt main raste badal gaye... Badalti sawarti thi kismat roj meri... Un dinoon baarish hoti thi dost Meri.. 12/06/16, 23:29

वो भुल गये की उन्हे हँसाया किसने था, जब वो रुठते तो मनाया किसने था, आज वो कहते है कि मे बहुत खुबसुरत हू, शायद वो भुल गये की उन्हे ये बताया किसने था🌹🌹

हर बार मुकद्दर को कुसूरवार कहना अच्छी बात नहीं , कभी कभी हम उन्हें मांग लेते है जो किसी और के होते है …….!!🙄

शक का कोई ईलाज नहीं होता, जो यकीं करता है कभी नराज नहीं होता, वो पूछते है हमसे कितना प्यार करते हो, उन्हे क्या पता मोहब्बत का हिसाब नहीं होता..|

वो बात करते हैं हमसे दूर जाने की हम कोशिश करते हैं उन्हें अपना बनाना की हर घडी इच्छा रहती है उन्हें बुलाने की फिर वो क्यों कोशिश करते हैं हमे रुलाने की।

जीवन* में आपसे *कौन मिलेगा,* ये *समय* तय करेगा. *जीवन* में आप *किस से मिलेंगे,* ये आपका *दिल* तय करेगा *_परंतु_* *जीवन* में आप किस-किस के *दिल* में बने रहेंगे, यह आपका *व्यवहार* तय करेगा.

सब के दिलों का* *एहसास अलग होता है …* *इस दुनिया में सब का* *व्यवहार अलग होता है …* *आँखें तो सब की* *एक जैसी ही होती है …* *पर सब का देखने का* *अंदाज़ अलग होता है …*

कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है, कोई कहता है प्यार सजा बन जाता है, पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है…

इस अदा का में किया जवाब दु आँखो में बसा तुम्हारे किया ख्वाब दु अच्छा सा फूल होता तो माली से मंगवता जो ख़ुद गुलाब है में उसे में किया गुलाब दु

कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते, हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते, अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा, बयां करते तो महफ़िल को रुला देते

हमें न मोहब्बत मिली न प्यार मिला; हम को जो भी मिला बेवफा यार मिला! अपनी तो बन गई तमाशा ज़िन्दगी; हर कोई अपने मकसद का तलबगार मिला!

वो रात दर्द और सितम की रात होगी, जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी, उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर, कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी

Tu mere naseeb mein Nahi hai kyunki mujhe Tera pyar aur bharosa chahiye tha aur tune mujhe meri aukat dikha de

Maine tujhe apna khuda mana aur tujhe bharosa Kiya kyunki Mera khuda Tu tha aur aaj bhi hai log toh hamesha khuda ko bharosa karte Hain lekin Mai sirf tujhe bharosa Karti hoon